हादसों से सबक ले सरकार और जनता

यह एक साल के अंदर ब्रिज गिरने की दूसरी घटना है। इससे पूर्व 3 जुलाई 2018 को अंधेरी स्टेशन के करीब एक फुटओवर ब्रिज का हिस्सा गिर गया था। जिसके चलते वेस्टर्न लाइन पर लोकल ट्रेनों की आवाजाही ठप हो गई थी। हादसे में कई लोग जख्मी हुए थे। गोखले ब्रिज गिरने के बाद भी सरकार ने सतर्कता नहीं बरती और सीएसटी स्टेशन के करीब यह हादसा देखने को मिला।

Sanjay Sharma

देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर जर्जर बिल्डिंगें व पुल गिरने, निर्माणाधीन इमारतें गिरने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इन घटनाओं में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। मुंबई में सीएसटी के पास एक फुट ओवरब्रिज गिरने की वजह से छह से अधिक लोगों की मौत हो गई। 23 से ज्यादा लोग घायल हो गये। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीम हासले में मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में जुटी है। इस तरह के अनेकों हादसों में करोड़ों का नुकसान हो चुका है। इन सबके बावजूद सरकार और जनता उन घटनाओं से सबक लेने को तैयार नहीं है। इसलिए आए दिन जर्जर पुल गिरने, जर्जर इमारत गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। इस मामले को गंभीरता से लेकर ठोस रणनीति बनाने और उस पर काम करने की जरूरत है। वहीं जनता को भी सतर्क रहना होगा और ऐसी किसी भी आशंका को देखते ही सरकार को जानकारी देने का संकल्प लेना होगा।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में फुटओवर ब्रिज गिरने की यह पहली घटना नहीं है। यह एक साल के अंदर ब्रिज गिरने की दूसरी घटना है। इससे पूर्व 3 जुलाई 2018 को अंधेरी स्टेशन के करीब एक फुटओवर ब्रिज का हिस्सा गिर गया था। जिसके चलते वेस्टर्न लाइन पर लोकल ट्रेनों की आवाजाही ठप हो गई थी। हादसे में कई लोग जख्मी हुए थे। गोखले ब्रिज गिरने के बाद भी सरकार ने सतर्कता नहीं बरती और सीएसटी स्टेशन के करीब यह हादसा देखने को मिला। इसी प्रकार सितंबर 2018 में पश्चिम बंगाल में हफ्ते भर के भीतर पुल गिरने की दो घटनाएं हुईं। पहला, दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी के नजदीक सात सितंबर को एक पुल अचानक से टूट गया। यहां से गुजर रहा ट्रक पूरी तरह लटक गया। इसी सप्ताह 4 सितंबर 2018 को कोलकाता के माजेरहाट में 40 साल पुराना पुल गिरा था। जिसमें एक व्यक्ति की मौत और 19 लोग घायल हो गये थे। यूपी के वाराणसी में मई 2018 में कैंट रेलवे स्टेशन के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर गया था, जिसमें 18 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इन सबके बावजूद सरकार और जनता सबक नहीं ले रही है।
दरअसल भारत एक विकासशील देश है। यहां निर्माण कार्य होता ही रहता है। लेकिन जो भी सरकारी या गैर सरकारी कार्यदायी संस्थाएं या निर्माण एजेंसियां निर्माण कार्य में लगी हैं, उन्हें सुरक्षा के हर पहलू का ध्यान देना होगा। वहीं जनता को भी उन रास्तों, पुलों या निर्माणाधीन इमारतों से गुजरने से बचना चाहिए, जहां हादसा होने की आशंका अधिक होती है। जब तक जनता और सरकार दोनों सतर्क नहीं होंगे ऐसे हादसे होते ही रहेंगे। वहीं गुणवत्ता का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।

 

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