यातायात व्यवस्था हादसे और सवाल

सवाल यह है कि सडक़ हादसों का ग्राफ कम क्यों नहीं हो रहा है? क्या ध्वस्त हो चुकी यातायात व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है? क्या तेज रफ्तार, यातायात नियमों का उल्लंघन और नशे में वाहन चलाने के कारण हादसों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है? क्या सडक़ों के निर्माण में हो रही धांधली लोगों की जान ले रही है? क्या अप्रशिक्षित चालक लोगों की जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं?

Sanjay Sharma

्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए सडक़ हादसों में चार लोगों की मौत हो गई जबकि तीन घायल हो गए। तमाम कवायदों और सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। हादसे साल-दर-साल बढ़ते जा रहे हैं। शीर्ष अदालत भी इसे लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुकी है। सवाल यह है कि सडक़ हादसों का ग्राफ कम क्यों नहीं हो रहा है? क्या ध्वस्त हो चुकी यातायात व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है? क्या तेज रफ्तार, यातायात नियमों का उल्लंघन और नशे में वाहन चलाने के कारण हादसों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है? क्या सडक़ों के निर्माण में हो रही धांधली लोगों की जान ले रही है? क्या अप्रशिक्षित चालक लोगों की जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं? आखिर सडक़ दुर्घटनाओं के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए? क्या नागरिकों के जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
राजधानी ही नहीं बल्कि प्रदेश के तमाम शहरों में आए दिन सडक़ हादसे हो रहे हैं। इन हादसों के पीछे कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है। सडक़ों के निर्माण में चल रही धांधली और इसकी बनावट ने हादसों को बढ़ा दिया है। दोयम दर्जे की बनी सडक़ों पर जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों के कारण तमाम लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी सडक़ों के गड्ढों को दुर्घटना का बड़ा कारण बताया है। इसके अलावा सडक़ों के निर्माण में बेहतर डिजाइन का ध्यान नहीं रखा जाता है। मानकों को दरकिनार कर स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। ये स्पीड ब्रेकर सुरक्षा की बजाय वाहन चालकों की जान के लिए खतरा बन गए हैं। यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। राजधानी लखनऊ के तमाम चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही अक्सर नदारद रहते हैं। कई स्थानों पर सिग्नल सिस्टम फेल हो चुका है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है। लिहाजा वाहन चालक धड़ल्ले से सडक़ पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि नशे व रफ्तार में वाहन चलाना इन दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह है। आंकड़ों के मुताबिक सडक़ हादसों में सबसे अधिक मौतें दो पहिया वाहन चालकों की हुई हैं। कई मौतें हेलमेट न लगाने के कारण हुई हैं। बावजूद इसके आज भी लोग हेलमेट लगाकर वाहन चलाने से गुरेज करते दिखते हैं। यदि सरकार सडक़ हादसों को रोकना चाहती है तो उसे न केवल सडक़ निर्माण में हो रही धांधली को रोकना होगा बल्कि यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त करना होगा। इसके अलावा लोगों से यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराना भी सुनिश्चित करना होगा।

 

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