तड़पता रहा मरीज, कमीशन सेट करते रहे डॉक्टर

  • चेंबर में एमआर से लेते रहे सैंपल, तीमारदारों ने जताई नाराजगी
  • अस्पताल प्रशासन से की मामले की शिकायत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल के मनोरोग विभाग के कमरा नंबर 112 की चौखट पर मरीज तड़पता रहा मगर डॉक्टर अपना कमीशन सेट करने में जुटे रहे। एमआर से सैंपल लेने में जुटे डॉक्टर तीमारदारों के कहने के बावजूद मरीज को देखने के लिए नहीं उठे। इस पर तीमारदारों ने डॉक्टर के अडिय़ल रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। तीमारदारों ने इसकी शिकायत अस्पताल के निदेशक से की।
मंगलवार को बलरामपुर अस्पताल के मनोरोग विभाग के ओपीडी में मरीजों की समस्याओं को सुनने और उनका बेहतर ढंग से इलाज करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉक्टर पीके श्रीवास्तव को दी गई थी। कमरा नंबर 112 के बाहर राजधानी और उसके आस-पास के जिलों से भारी तदाद में मरीज अपना इलाज कराने के लिए पहुंचे थे। पहले मरीजों ने लंबी कतार में लग करके पर्ची बनवाई। उसके बाद मनोरोग विभाग के कमरा नंबर 112 में बैठे डॉक्टर को दिखाने के लिए पहुंचे। मरीजों को बैठे हुए कई घंटे बीत गए, फिर भी डॉक्टर ने उन्हें देखा नहीं। राजधानी के बाहर के जिले से आई एक महिला नूर बानो रोने लगी, जिसे डॉक्टर कक्ष के बाहर बैठे कर्मचारी ने डपट दिया और कहा डॉक्टर साहब खाली होंगे तब दिखाया जाएगा मगर डॉक्टर साहब एमआर से बतियाने और सैंपल लेने में मशगूल रहे। वह भूल गए कि उनके कक्ष के बाहर तमाम मरीज उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच डॉक्टर कक्ष के बाहर हाय तौबा मच गई क्योंकि वहां पर खड़े-खड़े एक मरीज अचानक धड़ाम से गिर पड़ा। लोगों ने तुरंत डॉक्टर को मरीज के गिरने की जानकारी दी। फिर भी डॉक्टर अपनी कुर्सी से टस से मस नहीं हुए। इस पर राजाराम, रमेश कुमार, गीता देवी, सबिता, नूर बानो, रजिया, बृजेश कुमार, दुर्गेश, साधु कुमार, राहुल सक्सेना, कुमार राजीव, बृज किशोर गुप्ता आदि तीमारदारों ने डॉक्टर के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंनेआरोप लगाया कि ये डॉक्टर आए दिन मरीजों के साथ ऐसा ही दुव्र्यवहार करते हैं। उनकी मांग है कि इस तरह के डॉक्टर का स्थानांतरण राजधानी से दूर किया जाए, जिससे मरीजों को परेशान न होना पड़े।

कर्मचारियों ने भी जताई नाराजगी

मनोरोग विभाग में लंबे समय से इलाज करवा रहे मरीजों के तीमारदार ही नहीं, बल्कि वहां पर काम करने वाले कर्मचारियों में भी डॉक्टर पीके श्रीवास्तव की कार्यशैली को लेकर बेहद नाराजगी है। उनका कहना है कि आए दिन मरीजों को परेशान किया जाता है। डॉक्टर अपना ज्यादातर समय मरीजों को देखने के बजाय अन्य कामों में ज्यादा देते हैं।

लिया जाएगा स्पष्टïीकरण : निदेशक

बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज करने के लिए कटिबद्ध है, अगर चिकित्सक की ओर से मरीजों के इलाज में कोताही बरती जा रही है तो मामला गंभीर है। पूरे प्रकरण में चिकित्सक पीके श्रीवास्तव से जवाब-तलब किया जाएगा।

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