क्वीन मेरी अस्पताल की व्यवस्था बेपटरी हाथ पर हाथ धरे बैठे जिम्मेदार

  • एक बेड पर हो रहा दो मरीजों का इलाज, वार्ड में गंदगी का अंबार
  • जांच के लिए मिल रही लंबी वेटिंग, तीमारदारों का हाल भी बेहाल
  • शिकायतों के बाद भी नहीं हो रहा व्यवस्था में सुधार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी स्थित महिला एवं बाल चिकित्सालय क्वीन मेरी की तमाम व्यवस्थाएं बेपटरी हो चुकी है। हाल यह है कि यहां एक ही बेड पर दो मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वार्ड में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिसके कारण मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। वहीं जांच के लिए मरीजों को महीनों की वेटिंग दी जा रही है। तमाम शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्थाओं को सुधारने की कोई कोशिश नहीं कर रहे हैं।
क्वीन मेरी अस्पताल में बेहतर और गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सुविधा देने के राज्य सरकार के निर्देशों की धज्जियां उड़ रही हैं। बाल एवं महिला चिकित्सालय का आलम यह है कि यहां गर्भवती महिलाओं को अपने तीमारदार के साथ वार्ड की गैलरी में लेटना पड़ता है। इस दौरान नवजात बच्चे भी मां के साथ जमीन पर सोते हैं। इससे नवजातों में संक्रमण का खतरा बना रहता है। यही नहीं 375 बेड के इस अस्पताल में मरीजों को बेड तक नहीं मिल पा रहे हैं। दो-दो मरीजों को एक ही बेड पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। यह स्थिति बेहद चिंतनीय है। चौक निवासी शिखा के तीमारदार ने बताया कि डिलीवरी होने के बाद भी मरीज की सेहत में कोई सुधार नहीं आया है लेकिन डॉक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया है। वह बार-बार डॉक्टर से चेकअप के लिए कह रही थी लेकिन चिकित्सकों ने उसे घर जाने की सलाह दी। वहीं खदरा निवासी रश्मि ने बताया कि डॉक्टर ने उसे जांच करवाने को कहा था, लेकिन जांच करने वाले बहुत देर से पहुंचे। काफी देर बाद जांच हो सकी। क्वीन मेरी में तीमारदारों को रुकने के लिए भी कोई खास इंतजाम नहीं है, जिसके कारण तीमारदार भी मरीजों के साथ बेड पर लेटने को मजबूर हैं। अस्पताल के अंदर मरीजों को खाना समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता है। यही नहीं अस्पताल में गंदगी का आलम रहता हैं। कर्मचारियों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में जब अस्पताल की एचओडी डॉ. विनीता दास से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा।

रोजाना पहुंचते हैं 300 से अधिक मरीज

यहां पर रोजाना 300 से अधिक महिलाएं इलाज और जांच के लिए ओपीडी पहुंचती हैं लेकिन संस्थान में सीमित वेटिंग स्पेस के कारण आधे मरीजों को खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सुबह 9 बजे आने वाले मरीजों का नंबर 12 से एक बजे तक आ पाता है।

कर्मचारी करते हैं वसूली

भर्ती मरीजों ने बताया कि डिलीवरी के तुरंत बाद नर्स, वार्ड ब्वॉय और गार्ड शगुन के नाम पर रुपए मांगने लगते हैं। बिना रुपए दिए कर्मचारी मरीज के परिजनों को जाने नही देते हैं। अस्पताल में शगुन के नाम पर सबके रेट तय है। नर्स को 500, आया को 400 और गार्ड को 200 रुपए का देना होता है। मरीज के परिजनों के पास रुपए हो या न हो लेकिल से बिना रुपए लिए किसी को जाने नहीं देते।

 

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