राजधानी में धड़ल्ले से चल रहा अवैध निर्माण का खेल, शिकंजा कसने में नाकाम एलडीए

  • सस्ते के चक्कर में अवैध निर्माण के जरिए बने फ्लैट खरीद रहे ग्राहक
  • बिना नक्शा पास कराए आवासीय भूखंडो पर चल रहे निर्माण कार्य
  • सुपरवाइजर और अभियंताओं की मिलीभगत से चल रहा धंधा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में अवैध निर्माण का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। बिना नक्शा पास कराए आवासीय भूखंड़ों पर फ्लैट बनाकर बेचे जा रहे हैं। अवैध रूप से बने इन फ्लैटों को सस्ते में बेचा जा रहा है। लिहाजा ग्राहक इनकी ओर खींचे चले आ रहे हैं। यह सारा खेल एलडीए के सुपरवाइजर और अभियंताओं की मिलीभगत से चल रहा है। वहीं एलडीए प्रशासन इन पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रहा है।
अवैध निर्माण का आलम यह है कि 4.5 हजार वर्ग फुट के आवासीय भूखंडों पर ग्रुप हाउसिंग का निर्माण किया जा रहा है। इनको 5 से 6 मंजिल तक बनाया जा रहा है। इन फ्लैटों को बेचा जा रहा है। यह सारा खेल एलडीए की नाक के नीचे चल रहा है। हकीकत यह है कि शहर के कई क्षेत्रो में एलडीए के सुपरवाइजर और अभियंताओं की मिलीभगत से ग्रुप हाउसिंग का निर्माण हो रहा है। फ्लैट अवैध होने के कारण कम कीमत पर बनकर तैयार हो जाते हैं जिसके चलते कोई भी ग्राहक आसानी से इनकी तरफ आकर्षित हो जाता है। दूसरी ओर एलडीए के फ्लैट इसी कारण नहीं बिक पा रहे हैं। एलडीए के एक अधिकारी के मुताबिक शहर में जितने फ्लैट बन रहे हैं उनमें 50 फीसदी से अधिक अवैध निर्माण हैं। इनमें अधिकांश के खिलाफ एलडीए में कार्रवाई की जा रही है। अफसर का दावा है कि कई अवैध निर्माणों को एलडीए सील कर चुका है। वहीं कई ऐसे अवैध निर्माण हैं जिनको तोडऩे के आदेश लंबित हैं। कभी न कभी ऐसे अवैध निर्माण पर एलडीए को कार्रवाई करनी होगी। इस कार्रवाई को अभी टाला गया है। अधिकारी का दावा है कि कुछ प्रोजेक्टों को अगर छोड़ दें तो उसके बाद अभी भी एलडीए के फ्लैटों की कीमत गुणवत्ता और विकास को देखते हुए अधिक नहीं है। 80 प्रतिशत तक एलडीए के फ्लैट लोगों की सुविधा और उनके बजट के मुताबिक ही बनाए गए हैं। इसके ठीक उलट निजी बिल्डर्स का फायदा अवैध निर्माण पर ही टिका हुआ है। यही वजह है कि अनुमति से अधिक बहुमंजिला अपार्टमेंट में दो से तीन मंजिल तक अधिक ओपन स्पेस या बेसमेंट घेरकर अतिरिक्त यूनिट का निर्माण कर लिया जाता है। लिहाजा अवैध निर्माण कर बनाए तमाम फ्लैटों को बिल्डर कम कीमत में बेच देते हैं। दूसरी ओर एलडीए अपने प्रोजेक्ट बाइलॉज के मुताबिक बनवाता है। नक्शा पास होता है। ऐसे में निजी बिल्डर की तरह अवैध निर्माण कर ज्यादा यूनिट बनाकर प्रति फ्लैट की कीमत को कम नहीं किया जा सकता है।

दूसरे विभाग भी लापरवाह

एलडीए से लेकर दूसरे विभाग भी अवैध निर्माण पर सख्ती करने की जगह उसे बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। अवैध अपार्टमेंट बनने के बाद लेसा बिजली का कनेक्शन बिना लेआउट देख कर दे देता है। रजिस्ट्री कार्यालय में फ्लैट की रजिस्ट्री हो जाती है। नक्शा या कंपलीशन सर्टिफिकेट तक नहीं देखा जाता। नगर निगम भी अपनी आय के लिए ऐसे फ्लैटों का असेसमेंट कर कर निर्धारण कर देता है। एलडीए अवैध निर्माण का पता चलने के बाद भी सील करने और तोडऩे की कार्रवाई को लंबित ही रखता है। इसी से बिल्डर्स को फ्लैटों को बेचने की खुली छूट मिलती है।

Loading...
Pin It

Comments are closed.