सगे संबंधियों और रिश्तेदार के नाम पर वाहन खरीद कर जिले भर में दौड़ा रहे हैं विकास भवन के अफसर

  • अपने वाहन का ही दूसरे के नाम पर बिल, बाउचर बनवाकर सरकार के खाते से निकाल रहे हैं रुपये

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अगर परीक्षा देने के बाद किसी परीक्षार्थी को उत्तर पुस्तिका जांचने का काम दे दिया जाए तो जाहिर है, वह 100 में 100 नंबर ही लेगा। यही हाल विकास भवन में बैठने वाले अफसरों का है। यहां के ज्यादातर अफसरों ने अपने सगे संबंधियों और रिश्तेदारों के नाम पर बोलेरो सहित अन्य चार पहिया वाहन खरीद रखे हैं और उसी वाहन का बिल-बाउचर लगाकर अपनी जेबें गरम कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर बारीकी से जांच हो जाए तो कई अफसरों की गर्दन फंस जाएगी।
अफसरों को जिले भर में दौड़ा करने और विकास योजनाओं की स्थिति को धरातल पर जानने के लिए राज्य सरकार खुद वाहन खरीद कर देती थी। तब विकास भवन के अफसरों की मनमानी नहीं चल पाती थी, मगर सरकार की आर्थिक स्थिति डांवाडोल होने पर अफसरों को किराये पर वाहन लेने की अनुमति मिल गई। इसके बाद तो अफसरों की चल निकली और सरकार की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए अफसरों ने पहले अपने विभाग में चल रहे सरकारी वाहनों को एक-एक कर कंडम घोषित किया। जिसे तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने भी मान लिया। फलस्वरूप जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक के अफसरों ने फील्ड में दौडऩे के लिए नया वाहन अपने सगे संबंधियों के नाम पर खरीद लिया और अब वह खुद उसी वाहन का बिल-बाउचर लगा करके सरकारी खजाने को प्रति माह लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। वाहनों के मद में सरकार की ओर से मिलने वाला रुपया अफसरों की जेब में जा रहा है। विकास भवन के कर्मचारियों का कहना है कि सबसे अधिक निजी वाहन पंचायती राज महकमे में चल रहे हैं।

नीलामी के लिए अनुमति का इंतजार: पीडी

विकास भवन के परियोजना निदेशक राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि उनके दफ्तर के बाहर जितनी भी कंडम गाडिय़ां खड़ी हैं, सब उनके विभाग की नहीं है। उन गाडिय़ों में से कुछ गाडिय़ां अन्य विभागों की भी हैं। उन्होंने बताया कि गाडिय़ों की नीलामी के लिए परिवहन विभाग से अनुमति मांगी जा रही है और जिन अधिकारियों ने अपने सगे संबंधियों और रिश्तेदारों के नाम पर गाड़ी लेकर अपने विभाग में अटैच कर रखे हैं उसके लिए उनसे वरिष्ठ अधिकारी जांच करवा कर कार्रवाई कर सकते हैं।

जांच होगी तो नपेंगे कई अफसर

विकास भवन के कर्मचारियों की मानें तो विभाग में फैले भ्रष्टाचार में पीडी की भूमिका अहम है। यदि निजी वाहनों के मद में किये गए भुगतान संबंधी बिल-बाउचर की बारीकी से जांच हो गई तो विकास भवन के कई अफसर बेनकाब होंगे। कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह के बिल-बाउचर लगाए गए हैं, आडिट करने वाले कर्मचारी भी नहीं पकड़ पाए हैं। सर्वाधिक वाहनों का दुरुपयोग योजनाओं के प्रचार-प्रसार में हुआ है।

लाठी-डंडा लेकर रोड पर चलने वालों की खैर नहीं: डीएम

  • कहा,सुरक्षा से जुड़े जवान ही चुनाव तक कर सकेंगे डंडे का प्रयोग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के जिला मैजिस्ट्रेट कौशलराज शर्मा ने डंडा लेकर सडक़ पर चलने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से लेकर चुनाव सम्पन्न होने तक सुरक्षा से जुड़े जवानों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति लाठी-डंडा लेकर सडक़ पर नहीं चलेगा। यदि किसी ने भी चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह, राजनैतिक दल अथवा उम्मीदवार या कार्यकर्ता अपने साथ किसी प्रकार का आग्नेयास्त्र, धारदार हथियार या कुन्द वस्तुओं, जिन्हे फेंककर प्रहार किया जा सकता है तथा लाठी, डण्डा लेकर सम्पूर्ण जनपद की सीमा में नहीं चलेगा और न ही एकत्रित करेगा। यह प्रतिबन्ध ड्यूटी पर तैनात पुलिस, पीएसी, होमगार्ड, पीआरडी, सरकारी कर्मचारियों तथा रोगी एवं अपंग व्यक्तियों, जो अपने सहारे के लिए लाठी, डंडा का प्रयोग करते हैं, उन पर लागू नहीं होगा। सिक्ख समुदाय का व्यक्ति जो कृपाण धारण करते हैं, उन पर भी यह आदेश लागू नहीं होगा, परन्तु यदि वे किसी हिंसात्मक अथवा अवांछनीय गतिविध में लिप्त पाये जायेंगे तो उनके पास उपलब्ध हथियार जमा कराकर उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जायेगी।

चुनाव आयोग ने कहा अभिनंदन की तस्वीर फेसबुक से हटाए भाजपा

  • बीजेपी नेता ओपी शर्मा को लगा झटका, फेसबुक को भी लिखी चिट्ठी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही चुनाव आयोग की सख्ती शुरू हो गई है। रैली और भाषणों के अलावा इलेक्शन कमीशन इस बार सोशल मीडिया पर भी नजर बनाए हुए है। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के विधायक ओमप्रकाश शर्मा के द्वारा फेसबुक पर विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की तस्वीर साझा की गई थी, जिसे चुनाव आयोग ने हटाने का आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने इसके लिए फेसबुक को सूचित भी कर दिया है।
चुनाव आयोग की तरफ से पहले ही राजनीतिक दलों को कह दिया गया है कि कोई भी पार्टी अपने बैनर, पोस्टरों में सेना या सेना के जवान की तस्वीर का इस्तेमाल न करें। बता दें कि हाल ही में कई ऐसे पोस्टर देखने को मिले थे, जिनमें विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीर थी। इसलिए चुनाव आयोग की तरफ से न सिर्फ फेसबुक बल्कि ट्विटर को भी लोकसभा चुनाव के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है। जिसमें चुनाव से संबंधित सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने की बात कही गई है। गौरतलब है कि 10 मार्च को चुनाव आयोग ने आम चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान किया है, जिसके बाद से ही आचार संहिता लागू हो गई थी।
चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए चुनाव आयोग ने इस बार सोशल मीडिया पर भी सख्ती बरतने की बात कही है। इसके तहत फेसबुक, ट्विटर के अधिकारियों के साथ बैठकें भी की जा चुकी हैं। चुनाव आयोग ने सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को आदेश दिया है कि वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी आयोग को दें।

बिना अनुमति रोड कटिंग का बजट उड़ा रहा नगर निगम

  • फाइलों में अभियंताओं के सर्टिफिकेट के बिना लग रही कमिटमेंटसील

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर अभिंयताओं के सर्टिफिकेट के बिना नगर निगम में रोड कटिंग का बजट अन्य विकास कार्यों पर उड़ाया जा रहा है। बिना किसी सक्षम स्तर से फाइलों में कमिटमेंटसील लग रही है। पिछले दिनों ऐसी कई फाइलें चीफ इंजीनियर के पास पहुंचीं तो उन्होंने मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी को पत्र भेज कर रोड कटिंग मद में कमिटमेंटसील लगाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
चीफ इंजीनियर एसपी सिंह के मुताबिक नगर आयुक्त ने पूर्व में आदेश दिया था कि रोड कटिंग का बजट उसकी मरम्मत पर ही खर्च हो। अगर बजट शेष रह जाता है तो उस बजट से कोई भी विकास कार्य कराया जाए लेकिन इसके लिए नगर अभियंता का सर्टिफिकेट लगाना आवश्यक होगा। बावजूद इसके कई फाइलों में बिना सर्टिफिकेट के कमिटमेंटसील लगा दी गई।
बता दें, रोड कटिंग के संबंध में हाई कोर्ट में पीआईएल हो चुकी है। कोर्ट की ओर से प्रमुख सचिव आवास की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। जो यह जांच कर रही है कि रोड कटिंग की धनराशि कहीं फिजूलखर्च तो नहीं हो रही है। बाबजूद इसके नगर निगम इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।

 

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