जम्मू में आतंकी हमले के मायने

सवाल यह है कि सैन्य कार्रवाई के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? आतंकियों के निशाने पर जम्मू क्यों है? खुफिया इनपुट मिलने के बावजूद हमले को रोका क्यों नहीं जा सका? क्या यह हमला आतंकियों की बौखलाहट का नतीजा है? क्या इसके जरिए आतंकी जम्मू में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं?

Sanjay sharma

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ जारी जंग के बीच एक और आतंकी हमला किया गया। आतंकियों ने जम्मू के एक बस स्टैंड को निशाना बनाया। ग्रेनेड हमले में 32 लोग घायल हो गए जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया। यह हमला हिजबुल मुजाहिदीन के कुलगाम जिला कमांडर के इशारे पर किया गया था। सवाल यह है कि सैन्य कार्रवाई के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? आतंकियों के निशाने पर जम्मू क्यों है? खुफिया इनपुट मिलने के बावजूद हमले को रोका क्यों नहीं जा सका? क्या यह हमला आतंकियों की बौखलाहट का नतीजा है? क्या इसके जरिए आतंकी जम्मू में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं? क्या पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर हुई भारतीय एयर स्ट्राइक के बाद आतंकियों ने अपने स्लीपर सेल सक्रिय कर दिए हैं? क्या यह किसी बड़े हमले का संकेत है?
कश्मीर घाटी के बाद अब आतंकी जम्मू को निशाना बना रहे हैं। घाटी में आतंकवादी सेना को निशाना बनाते हैं वहीं जम्मू में वे जनता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ताजा आतंकी हमला इसकी पुष्टिï कर रहा है। नागरिकों को निशाना बनाने के पीछे आतंकियों का मकसद यहां सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाडऩा है। एक साल में यहां नौ बार ग्रेनेड हमला किया गया है। हमले का मकसद यह दिखाना भी है कि भारतीय सेना द्वारा जैश के आतंकी ठिकाने को तबाह कर देने से उनकी कमर टूटी नहीं है। जैश पर हुई कार्रवाई के बाद से अनुमान था कि अब आतंकवादी अपने स्लीपर सेल को सक्रिय करेंगे और उनके जरिए भारत में आतंकी गतिविधियां चलाएंगे। हमले से यह बात भी साफ हो गई है कि जम्मू में आतंकियों की पकड़ अभी नहीं बनी है। यदि ऐसा होता तो आतंकवादी को पुलवामा से जम्मू नहीं भेजा जाता। यह गंभीर चिंता का विषय है कि हाई अलर्ट के बाद भी आतंकी हमला करने में कामयाब हो गये। खुफिया इनपुट मिलने के बाद भी लापरवाही क्यों बरती गई? इसमें दो राय नहीं है कि पाकिस्तान में बैैठे आतंकी कश्मीर घाटी समेत देश के कई कोनों में अपने स्लीपर सेल सक्रिय कर रखे हैं। ये स्लीपर सेल अपने आका के एक इशारे पर कहीं भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। जाहिर है, यदि आतंकवाद को खत्म करना है तो सबसे पहले इन स्लीपर सेल को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। साथ ही सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी क्योंकि जैश का ठिकाना तबाह होने और ऑपरेशन ऑल आउट से आतंकी बौखलाए हुए हैं और पलटवार की फिराक में हैं।

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