प्रियंका के सवालों से महारथियों को छूट रहा पसीना

  • आम कार्यकर्ताओं को उम्मीद, जल्द बहुरेंगे काम करने वालों के दिन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की नजरें संगठन की मजबूती और लोकसभा चुनाव में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन पर टिकी हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरे संगठन को एकजुट रखने की है। इसलिए वह सहज-आत्मीय माहौल, चेहरे पर मुस्कान, धीमी आवाज और बातचीत की आत्मीयता के बीच सबके मन की बात जानने में जुटी हैं। लेकिन सवाल ऐसे कठोर कि प्रियंका की पाठशाला में बड़े-बड़े महारथियों को माघ के महीने में भी पसीना छूट रहा है। वहीं आम कार्यकर्ता में उम्मीद जगी है कि अब जमीन पर काम करने वाले लोगों के दिन भी बहुरेंगे। फिलहाल प्रियंका सबको एक ही संदेश दे रही हैं-‘बूथ स्तर तक मेहनत करो, सब मिलकर लोकसभा चुनाव जिताओ।’
प्रियंका में इंदिरा गांधी की झलक देखने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। प्रदेश के गृह मंत्री रहे पं. गोपीनाथ दीक्षित की बेटी और सक्रिय महिला नेता आरती बाजपेयी बताती हैं कि प्रियंका का चलने, बात करने, बैठने, कपड़े पहने का तरीका सब दादी जैसा है।
विधायक मोना से लेकर आम कार्यकर्ता हिमांशु दीक्षित (गोरखपुर) को भी प्रियंका में दादी इंदिरा की झलक दिखती है। प्रियंका की अध्यक्षता में दो दिन में करीब डेढ़ दर्जन लोकसभा सीटों की बैठक हो चुकी हैं और एक भी बैठक में उन्होंने अपना आपा नहीं खोया। तब भी नहीं, जब एक बैठक में शहर अध्यक्ष पर 12 लाख रुपये लेने का आरोप लगा या पदाधिकारियों के मुंह पर कार्यकर्ताओं ने संगठन में अपनी गोटें बिठाने, हवा-हवाई लोगों को टिकट देने, जमीनी कार्यकर्ताओं को कोई पद न देने जैसे आरोप लगाए।
प्रियंका माहौल को नियंत्रित करते हुए बड़ी शालीनता और सहजता से बोलीं, ‘पार्टी को मिलकर मजबूत करोगे। जो प्रत्याशी देंगे, उसे जिताओगे? उनका पूछना होता है और माहौल शान्त, सब हामी भरने लगते हैं।’

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