यूपी बोर्ड परीक्षाएं और नकल रोकने की चुनौती

सवाल यह है कि यूपी बोर्ड के छात्रों को नकल की जरूरत क्यों पड़ रही है? सख्ती के बावजूद नकल माफिया पर शिकंजा क्यों नहीं कस पा रहा है? क्या शिक्षा का गिरता स्तर छात्रों को नकल के रास्ते पर ले जा रहा है? क्या नकल के कारण प्रतिभाशाली छात्रों का आत्मबल कमजोर नहीं होगा? क्या शिक्षा और शिक्षण पद्धति में आमूल परिवर्तन की जरूरत है?

Sanjay Sharma

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा चल रही हैं। सख्ती के बावजूद नकल माफिया छात्रों को नकल कराने का कोई न कोई रास्ता निकाल ले रहे हैं। इसकी पुष्टिï पकड़े गए परीक्षार्थियों की संख्या से हो रही है। कुछ लोग दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते पकड़े गए जबकि कई स्थानों पर कक्ष निरीक्षक से लेकर केंद्र संचालक तक परीक्षार्थियों को नकल कराने में शामिल मिले हैं। सामूहिक नकल का मामला भी सामने आ चुका है। सवाल यह है कि यूपी बोर्ड के छात्रों को नकल की जरूरत क्यों पड़ रही है? सख्ती के बावजूद नकल माफिया पर शिकंजा क्यों नहीं कस पा रहा है? क्या शिक्षा का गिरता स्तर छात्रों को नकल के रास्ते पर ले जा रहा है? क्या नकल के कारण प्रतिभाशाली छात्रों का आत्मबल कमजोर नहीं होगा? क्या शिक्षा और शिक्षण पद्धति में आमूल परिवर्तन की जरूरत है? क्या परीक्षा में हो रही नकल गुणवत्तायुक्त शिक्षा के दावों की पोल नहीं खोल रही है? क्या नकल के लिए वर्तमान शिक्षा पद्धति और अध्यापकों का रवैया जिम्मेदार नहीं है?
प्रदेश सरकार भले ही नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए तत्पर हो और इसके लिए तमाम जरूरी कदम उठाए हों लेकिन नकल माफिया अभी भी सक्रिय हैं। कड़े कानूनी प्रावधान के बाद भी इस पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। शहरों में भले ही सख्ती का असर दिख रहा हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में नकल को रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। तमाम ग्रामीण इलाकों में नकल माफिया, कक्ष निरीक्षक और केंद्र संचालकों की मिलीभगत से नकल का धंधा धड़ल्ले से चला रहे हैं। कई स्थानों में सामूहिक नकल की व्यवस्था की जा रही है। नकल कराने के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। कई स्कूलों में छात्रों को बेंचं पर बैठाया जा रहा है ताकि आसानी से नकल करायी जा सके। दरअसल, छात्रों में नकल की बढ़ती प्रवृत्ति की असली वजह शिक्षा के स्तर में आई गिरावट है। अधिकांश स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों का कोर्स परीक्षा के समय तक पूरा नहीं हो पाता है। शिक्षक पढ़ाई के अलावा अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं। अप्रशिक्षित शिक्षकों के कारण भी शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। ऐसे में छात्र परीक्षा को येन-केन-प्रकारेण पास करने की कोशिश करते हैं। छात्र की इसी कमजोरी का फायदा नकल माफिया उठाते हैं और नकल कराने के एवज में मोटी रकम वसूलते हैं। नकल से पास छात्र बाद में प्रतियोगी परीक्षाओं में बाहर होजाते हैं। यदि सरकार नकलविहीन परीक्षा कराना चाहती है तो उसे सबसे पहले गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने पर जोर देना होगा। साथ ही शिक्षकों को शिक्षा के अलावा अन्य कार्यों से अलग रखना होगा।

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