यहां चलता है महिलाओं का राज

नई दिल्ली। अधिकतर देशों में पुरुषों का राज चलता है.लेकिन कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां पर पुरुषों का नहीं बल्कि महिलाओं का राज चलता है। जी हां, जिस तरह पुरुष महिलाओं पर हुकुम चलाते हैं वैसे ही महिलाएं पुरुष पर हुकुम चलाती हैं। हमारे यहां शादी के बाद महिला को अपना घर छोड़कर पति के घर जाना पड़ता है लेकिन हम एक ऐसी जनजाति के बारे में बताने जा रहे है जहां लड़कों की नहीं बल्कि लड़कियों का राज चलता है।
दरअसल, मेघालय, असम तथा बांग्लादेश के कुछ क्षेत्रों में खासी जनजाति के लोग रहते हैं। इस जनजाति में लड़कों को ज्यादा अहमियत नहीं दी जाती। यहां लड़कों के पैदा होने पर इतनी खुशी नहीं मनाई जाती जितनी लड़कियों के जन्म देने पर होती है। इतना ही नहीं यहां शादी करके लड़कियों के बजाए लड़के विदा होते हैं। ये भी बात अहम है कि यहां परिवार के सभी फैसले लड़कियां ही ले सकती है यानि यहां पर महिलाएं वे सब काम करती हैं जो पुरुष किया करते हैं। आपको जानकारी होगी की बाजार और दुकानों पर भी महिलाएं ही काम करती हैं और बच्चों का उपनाम भी मां के नाम पर होता है। इस समुदाय में लड़कियां बचपन में जानवरों के अंगों से खेलती हैं और उनका इस्तेमाल आभूषण के रूप में भी करती हैं।

खूबसूरत पक्षियों का गांव
उदयपुर। शहर के कौतुहल से दूर एक जगह ऐसी भी है जिसे बर्ड विलेज यानी परिंदों का गांव कहा जाता है। यहां दूर-दूर तक तालाबों में तीन हजार किलोमीटर दूरी का फासला तय करके आए पक्षियों का जमावड़ा दिखता है। ठंड के मौसम की शुरुआत होते ही चीन, मंगोलिया, साइबेरिया और सेंट्रल एशिया से लेकर यूरोप तक के पक्षियों की प्रजाति पहुंचने लगती है।
पर्यटक जो पक्षियों को देखने के शौकीन हैं और इन्हें कैमरे में कैद करना चाहते हैं उनके लिए यहां की ट्रिप बेहतर विकल्प है। यहां के तालाबों में इन दिनों मध्य यूरोप, साइबेरिया, मध्य एशिया, मंगोलिया, तंजानिया, रशिया से आने वाले प्रवासी पक्षी हजारों की संख्या में देखे जा सकते हैं। मेनार में ऐसे कई तालाब हैं जहां इन दिनों परिंदों की चहक के साथ इनकी संख्या में भी इजाफा हो रहा है। एक्सपट्र्स की माने तो यहां हेडेड गूज, ब्राह्मणी डक, विजन, कॉमन पोचार्ड, शॉवलर, गेडवाल, टफटेल पोचार्ड, कॉमन टील, ब्लेक टेल गॉडविट, मार्श हेरियर, कॉमन क्रेन, रेड शेंक, सेंउ पाइपर, विस्कर्ड टर्न, सी गल, रिंग प्लॉवर सहित कई अन्य प्रजातियों के स्थानीय पक्षी भी देखे जा सकते हैं। साथ ही इस तालाब पर हर साल हजारों की संख्या में देश-विदेश से सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी आते हैं।

 

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