हाउस टैक्स बढ़ाने के लिए अब लेसा की मदद लेगा नगर निगम, चिन्हित होंगे व्यावसायिक की जगह आवासीय टैक्स जमा करने वाले

  • छूटे भवन स्वामियों को भी खोजने में मिलेगी मदद
  • हाउस टैक्स बिल पर दर्ज किया जाएगा बिजली कनेक्शन का नंबर
  • व्यवस्था लागू हुई तो दोगुनी हो सकती है निगम की आमदनी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। हाउस टैक्स मद में अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए नगर निगम अब लेसा की मदद लेगा। लेसा की मदद से नगर निगम ऐसे भवन स्वामियों को खोज निकालेगा जो व्यावसायिक उपयोग के बावजूद आवासी दरों पर हाउस टैक्स दे रहे हैं। यही नहीं लेसा की सूची के आधार पर उन भवन स्वामियों तक भी पहुंचने का रास्ता मिलेगा जो अभी तक हाउस टैक्स के दायरे में नहीं आ सके हैं। इसके लिए नगर निगम अपने हाउस टैक्स बिल पर बिजली कनेक्शन नंबर भी दर्ज करेगा। इससे यह पता चल सकेगा कि संबंधित भवन का उपयोग आवासीय हो रहा है या व्यावसायिक। इसके अलावा ऐसे बिजली कनेक्शन नंबर होंगे जो नगर निगम की हाउस टैक्स की सूची में नहीं होंगे, ऐसे भवनों को खोज कर उनका कर निर्धारण किया जाए।
नगर निगम में करीब 5.50 लाख हाउस टैक्स आता है। इनमें करीब 62 हजार भवन स्वामी ऐसे हैं जो व्यावसायिक हाउस टैक्स के दायरे में है और इनका व्यावसायिक कर निर्धारण है। वहीं शहर में आवासीय और व्यावसायिक मिलाकर बिजली कनेक्शन की संख्या 9.50लाख है। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 3-4 लाख भवन हाउस टैक्स के दायरे में नहीं है और इनका कर निर्धारण नहीं किया गया है। लेसा की इसी सूची में व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन लेने वाले भी शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक अगर लेसा की व्यावसायिक विद्युत कनेक्शन की सूची और नगर निगम की व्यावसायिक भवनों की सूची देखी जाए तो उसमें से ऐसे व्यावसायिक भवनों को चिन्हित किया जा सकता है जो आवासीय दरों पर हाउस टैक्स दे रहे हैं या अभी तक उनका कर निर्धारण ही नहीं किया गया। इस संबंध में उत्तर प्रदेश पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड ने पहले ही कह दिया कि गृह कर के बिल पर बिजली कनेक्शन का नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए ताकि उस नंबर के जरिए बिजली विभाग से यह पता किया जा सके कि किस तरह (आवासीय या व्यावसायिक) का उपयोग किया जा रहा है। उसी आधार पर भवन स्वामी से हाउस टैक्स वसूल किया जाएगा।

कर निर्धारण के बावजूद तीन लाख भवन स्वामी नहीं दे रहे टैक्स

नगर निगम सीमा में करीब साढ़े पांच लाख भवन है, जिसमें से मात्र ढाई लाख ने ही हाउस टैक्स जमा किया हैं। करीब तीन लाख लोगों ने हाउस टैक्स जमा नहीं किया है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार पुराना और मौजूदा मिलाकर करीब 700 करोड़ रूपया टैक्स बकाया है। इसमें 151 करोड़ रूपया सरकारी भवनों का है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि ऐसे भवन स्वामियों की संख्या भी ज्यादा है जिनका कर निर्धारण हो चुका है। इसके बावजूद वे टैक्स नहीं जमा कर रहे हैं।

क्या है नियमावली

हाउस टैक्स नियमावली के तहत व्यावसायिक संपत्ति पर गृह कर आवासीय का पांच गुना होता है। ऐसे व्यावसायिक संपत्ति का गृहकर आवासीय में कराकर करीब लाखों भवन स्वामी नगर निगम को चूना लगा रहे हैं। इसमें नगर निगम कर्मचारियों की मिलीभगत है।

 

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