सीबीआई विवाद में सरकार को ‘सुप्रीम’ झटका, आलोक वर्मा निदेशक पद पर बहाल

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को किया रद्द
  • नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे आलोक वर्मा
  • सेलेक्शन कमेटी करेगी मामले पर गौर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने आज सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के अधिकार वापस लेने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि आलोक वर्मा कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हैं। कोई नई जांच शुरू नहीं करवा सकते हैं। आलोक वर्मा का कार्यकाल जनवरी में खत्म होगा।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने वर्मा को पद पर बहाल करते हुए कहा कि मामला सेलेक्शन कमेटी के पास जाएगा जो इस मुद्दे पर गौर करेगी। सीजेआई गोगोई की ओर से फैसला सुनाते हुए जस्टिस कौल ने कहा कि सेलेक्शन कमेटी आज से सात दिनों के भीतर बैठक करेगी और तब तक वर्मा किसी भी तरह के नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने फैसले के बाद कहा कि आलोक वर्मा को बहाल कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति समिति (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी दल के नेता और चीफ जस्टिस) एक सप्ताह के भीतर उनके नीतिगत कामों पर फैसला लें। सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज की याचिका पर फैसला सुनाया है। आलोक वर्मा की याचिका में केंद्र के 23 अक्टूबर के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सरकार ने वर्मा को देश की प्रमुख एजेंसी के निदेशक पद के अधिकारों से वंचित कर दिया था। सीबीआई विवाद में एनजीओ की तरफ से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने आज सरकार और सीवीसी के आलोक वर्मा को पद से हटाने का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने उनकी शक्तियां छीनने और छुट्टी पर भेजने के फैसले को अवैध ठहराया।

मामला अभी खत्म नहीं हुआ: जेटली

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने सीबीआई की साख बचाने के लिए सीवीसी की सिफारिश के आधार पर फैसला लिया था। हम कोर्ट के फैसले का पालन करेंगे, हालांकि अभी सरकार इस फैसले का अध्ययन करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि ये मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।

सरकार के लिए सबक: मल्लिकार्जुन

लोक सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि हम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह सरकार के लिए सबक है। आज आप कुछ लोगों पर दबाव बनाने के लिए इन एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं, कल कोई और करेगा, ऐसे में लोकतंत्र का क्या होगा?

क्या था मामला

सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। सरकार ने उनकी जगह नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम चीफ नियुक्त किया था। सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा के अलावा एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से अर्जी दाखिल कर मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई थी। साथ ही सरकार द्वारा छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

गरीब सवर्णों को आरक्षण चुनावी स्टंट: माया

बसपा प्रमुख ने पूछा, पहले क्यों नहीं लिया गया फैसला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले का बसपा सुप्रीमो मायावती ने समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि सवर्णों को आर्थिक आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण का फैसला चुनावी स्टंट है। सरकार ने ये फैसला पहले क्यों नहीं किया। ये चुनावी छलावा है।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले का समर्थन करती है और संसद में पेश किए जाने वाले संविधान संशोधन बिल का समर्थन करेगी। हालांकि, मायावती ने मौजूदा समय में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के मिलने वाले करीब 50 फीसदी आरक्षण के कोटे के दायरे को बढ़ाने की मांग भी की। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि देश में अभी तक एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग को जो 49.5 फीसदी आरक्षण मिलता है उसकी समीक्षा करने की जरूरत है।

लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश
लोकसभा चुनाव से ऐन पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने पर मुहर लगा दी है। आज संविधान संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने संशोधन विधेयक को पेश किया। सदन में इस पर चर्चा होगी।

कैबिनेट बैठक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट मीटिंग हुई। इसमें कुल नौ प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, मंत्री ब्रजेश पाठक, सिद्धार्थ नाथ सिंह आदि मौजूद रहे।

 

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