विदेशों में भारतीय संस्कृति का परचम फहराने में संतों की अहम भूमिका: स्वामी कैलाशानंद

  • काली मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ने विदेशी श्रद्धालुओं को बताया मां गंगा का महत्व

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। पतित पावनी मां गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्टï हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह उद्गार दक्षिण काली मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मïचारी महाराज ने नीलधारा तट पर स्थित मंदिर प्रांगण में श्रद्धालु को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि विदेशों में हमारी भारतीय सनातन परंपराओं को पूजा जाता है। करोड़ों विदेशी भारतीय संस्कृति को अपनाकर भारत में आकर रहना चाहते हैं और यहां संत महापुरुषों का आशीर्वाद लेकर अपना जीवन सफल बनाना चाहते हैं क्योंकि विदेशों में भारतीय संस्कृति का परचम फहराने में संत महापुरुषों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति से प्रसन्न होकर ही तमाम विदेशी भारत आते हैं और संत-महापुरुषों की शरण में रहकर यहां के धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं। वे पूजा और साधनाओं में लीन होकर हमारी भारतीय संस्कृति को जानना चाहते हैं। विदेशी श्रद्धालु अपने देशों में जाकर भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करके भारत का गौरव बढ़ाते हैं। विदेश से आए स्वामी व्यासानंद ब्रह्मïचारी ने कहा कि गंगा के तट पर आकर मुझे ऐसा लगता है कि जैसे मैंने साक्षात ईश्वर की प्राप्ति कर ली हो और मां गंगे के जल का आचमन करके मेरा जीवन धन्य हो गया है। इस दौरान सैकड़ों विदेशी श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

कॉस्मिक चिकित्सा पद्धति को बताया क्रांतिकारी

अमेरिका, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया और जापान के श्रद्धालुओं का एक दल संतों के साथ कनखल जगजीतपुर स्थित कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र पहुंचा। दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मïचारी ने कॉस्मिक पद्धति को क्रांतिकारी खोज बताया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैलाशानंद ने कहा कि विश्व के प्रथम अंतरराष्टï्रीय हीलर डॉक्टर अजय मगन ने चिकित्सा के क्षेत्र में नयी क्रांति का सूत्रपात किया। विदेशी नागरिक भी इस पद्धति का लाभ ले सकेंगे। वहीं केंद्र के निदेशक अजय मगन ने बताया कि प्राचीन काल में भारतीय ऋषि-मुनि ब्रह्मïांडीय ऊर्जा के प्रयोग से खुद को निरोग और दीर्घायु बनाए रखते थे।

 

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