परीक्षा में सेंध, सॉल्वर गैंग और व्यवस्था

सवाल यह कि क्या परीक्षाओं की शुचिता और उसकी प्रासंगिकता खत्म होती जा रही है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे परीक्षा तंत्र और इसे संचालित करने वाले विभागों को चपेट में ले लिया है? कड़े कानूनों के बावजूद नकल माफिया के हौसले बुलंद क्यों हैं? नकल करके शिक्षक बनने वाले बच्चों को कैसी शिक्षा देंगे? क्या नकल माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है?

Sanjay Sharma

सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में सेंध लगा रहे सॉल्वर गैंग के एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें गैंग का मास्टर माइंड, प्रधानाचार्य और कक्ष निरीक्षक शामिल हैं। आरोपियों के पास से दो लाख रुपये, कई मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद हुए हैं। यह भी खुलासा हुआ है कि इस गैंग ने कई अन्य परीक्षाओं में भी सेंधमारी की थी। अहम सवाल यह कि क्या परीक्षाओं की शुचिता और उसकी प्रासंगिकता खत्म होती जा रही है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे परीक्षा तंत्र और इसे संचालित करने वाले विभागों को चपेट में ले लिया है? कड़े कानूनों के बावजूद नकल माफिया के हौसले बुलंद क्यों हैं? नकल करके शिक्षक बनने वाले बच्चों को कैसी शिक्षा देंगे? क्या नकल माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है? क्या ऐसी घटनाएं परीक्षाओं से लोगों का विश्वास नहीं उठा देगी? क्या हम एक नकलची और भ्रष्टïाचारी समाज का निर्माण नहीं कर रहे हैं? क्या सरकार को इस तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत नहीं है?
पूरे प्रदेश में नकल माफिया सक्रिय हैं। बोर्ड से लेकर भर्ती परीक्षाओं तक में ये नकल कराने का धंधा करते हैं और इसके एवज में मोटी रकम लेते हैं। नकल माफिया का जाल शिक्षा विभाग से लेकर परीक्षा केंद्रों तक फैला है। पैसे के बल पर वे न केवल परीक्षार्थी को नकल उपलब्ध कराते हैं बल्कि उसकी जगह सॉल्वर को बैठा देते हैं। यह सारा खेल अधिकारियों, केंद्र संचालकों और कक्ष निरीक्षकों की मिलीभगत से चल रहा है। हर परीक्षा का अलग-अलग पैकेज है। किसी एक पेपर में नकल कराने का रेट अलग है जबकि सॉल्वर के जरिए परीक्षा पास कराने का अलग रेट होता है। नकल माफिया अपने संपर्कों के जरिए पेपर लीक करा देते हैं। बोर्ड, मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं को पास कराने का ठेका लिया जाता है। इसके अलावा ये भर्ती परीक्षाओं में भी नकल की पूरी व्यवस्था करते हैं। जैसे ही कोई परीक्षा करीब आती है, सॉल्वर गैंग के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। ये एजेंट के जरिए परीक्षार्थी से संपर्क करते हैं और उसको पास कराने का आश्वासन देते हैं। इसके एवज में उससे अच्छी-खासी रकम ली जाती है। यह रकम संचालक, कक्ष निरीक्षक और अन्य में बांट दी जाती है। एसटीएफ द्वारा पकड़ा गया सॉल्वर गैंग बानगी भर है। हालात बेहद खराब हो चुके हैं और इनसे निपटना सरकार के लिए आसान नहीं है क्योंकि परीक्षा संचालित कराने वाले तंत्र तक इनकी घुसपैठ है। यदि सरकार परीक्षाओं में सेंध लगने से बचाना चाहती है तो उसे संबंधित विभागों से भ्रष्टïाचार को समाप्त करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो परीक्षा की साख खत्म हो जाएगी।

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