अनुशासन का पाठ भूली उत्तर प्रदेश पुलिस अफसर और पुलिसकर्मी पार करने लगे हद

  • वॉट्सएप ग्रुप में अफसरों के बीच हुए विवाद ने सरकार की कराई किरकिरी
  • प्रदेश में बढ़ रहे अपराधों पर नकेल कसने की जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे कर्मी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। एक ओर प्रदेश में अपराधों पर लगाम नहीं लग पर रही है वहीं दूसरी ओर पुलिस में अनुशासनहीनता चरम पर पहुंच गई है। हाल यह है कि पुलिस कांस्टेबल के अलावा अब सीनियर आईपीएस अफसर भी अनुशासनहीनता की हदों को पार कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में अपराध कैसे कम होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
यूपी पुलिस में अनुशासन की दीवार दरकने लगी है। पिछले एक साल में यूपी पुलिस के कॉस्टेबल से लेकर सीनियर आईपीएस अफसरों तक ने अनुशासन की हदों को तोडऩे की कोशिश की। इस दौरान आला अफसर उनको कंट्रोल में रखने के बजाए डैमेज कंट्रोल करते ही नजर आए। अनुशासनहीनता का ताजा मामला आईपीएस अफसरों के वॉट्सएप गु्रप में हुए विवाद से जुड़ा है। इस ग्रुप में आईपीएस अफसर ही एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे। हैरानी की बात यह है कि इस ग्रुप से डीजीपी भी जुड़े थे। उनकी मौजूदगी के बावजूद ग्रुप में विवाद चलता रहा। किसी भी आला अधिकारी ने उन्हें रोकने या हालात को संभालने की पहल नहीं की। बाद में एडीजी एलओ आनन्द कुमार के हस्तक्षेप के बाद विवाद थमा। इस दौरान डीजीपी की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आई। हालांकि इस विवाद के सामने आने के अगले दिन डीजीपी ने ग्रुप को जरूर छोड़ दिया। आला अफसरों के विवाद ने पूरे महकमे की फजीहत करा दी। हैरानी की बात यह है कि पुलिस के तमाम अधिकारियों ने यह जानकारी करने की भी कोशिश नहीं की कि आखिर किसने विभाग और सरकार की छवि खराब करने के लिए निजी ग्रुप की चैट सोशल मीडिया पर लीक की।

¥æÜæ ¥È¤âÚUô´ ·ð¤ çßßæÎ Ùð ÂêÚUð ×ã·¤×ð ·¤è ȤÁèãÌ ·¤ÚUæ ÎèÐ ãñUÚUæÙè ·¤è ÕæÌ ØãU ãñU ç·¤ ÂéçÜâ ·ð¤ Ì×æ× ¥çÏ·¤æçÚUØæð´ Ùð Øã ÁæÙ·¤æÚUè ·¤ÚUÙð ·¤è Öè ·¤ôçàæàæ Ùãè´ ·¤è ç·¤ ¥æç¹ÚU ç·¤âÙð çßÖæ» ¥õÚU âÚU·¤æÚU ·¤è Àçß ¹ÚUæÕ ·¤ÚUÙð ·Ô¤ çÜ° çÙÁè ‚æýé ·¤è ¿ñÅU âôàæÜ ×èçÇØæ ÂÚU Üè·¤ ·¤èÐ

काली पट्टी बांधकर किया था प्रदर्शन

विवेक तिवारी हत्याकांड में दो सिपाहियों को जेल भेजे जाने के विरोध में प्रदेश के कई जिलों में सिपाहियों से लेकर एसआई तक ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किए थे। यूपी पुलिस के इतिहास में पहली बार इस तरह से अनुशासन की हदें टूटी। डीजीपी ओपी सिंह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कहते रहे इसके बावजूद कई जगह प्रदर्शन हुए। इस विरोध को दबाने के लिए सिपाहियों के वेलफेयर से जुड़े कई कदम उठाए गए। डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह ने खुद जाकर सिपाहियों की काउंसिलिंग की। उनकी समस्याएं सुनीं। तब भी कई दिनों तक विरोध के सुर बरकरार रहे।

पुलिस वीक का किया था बहिष्कार
इससे पहले पीपीएस अफसरों ने अपनी मांगों को लेकर पुलिस वीक का बहिष्कार कर दिया था। इससे सरकार और यूपी पुलिस की फजीहत हुई। आखिर में पहले मुख्य सचिव अनूप चंद्र पाण्डेय, फिर डीजीपी ओपी सिंह ने उनकी मांगे सुनीं हालांकि दो मुलाकातों के बाद भी उनकी समस्या, मांगें जस की तस बनी हुई हैं। इसको लेकर उनका विरोध कभी भी फूट सकता है।

 

Loading...
Pin It