जानलेवा स्टंट, जागरूकता और पुलिस का रवैया

सवाल यह है कि सडक़ों पर स्टंट करने वाले युवकों के खिलाफ पुलिस सख्ती क्यों नहीं बरत रही है? क्या स्टंट को लेकर पुलिस पूरी तरह उदासीन है? क्या सडक़ पर स्टंट करने वाले दूसरे राहगीरों के लिए खतरा नहीं बन रहे हैं? क्या ऐसे स्टंट सडक़ हादसों को न्योता नहीं दे रहे हैं? क्या जागरूकता का अभाव इस तरह के स्टंट की असली वजह है? क्या सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान बेअसर हैं?

Sanjay sharma

युवाओं में स्टंट करने का क्रेज जानलेवा साबित हो रहा है। राजधानी के जनेश्वर मिश्र पार्क के पास स्टंट करने के दौरान एक युवक बाइक से उछलकर चौराहे की रेलिंग पर जा गिरा। रेलिंग का नोकदार सरिया उसके मुंह में घुस गया। युवक के साथ बाइक पर बैठे दो अन्य युवक भी घायल हो गए। फिलहाल तीनों का इलाज चल रहा है। यह घटना एक बानगी भर है। हालत यह है कि देश भर में स्टंट से कई लोगों की जान जा चुकी है। बावजूद स्थितियों में सुधार नहीं हो रहा है। अहम सवाल यह है कि सडक़ों पर स्टंट करने वाले युवकों के खिलाफ पुलिस सख्ती क्यों नहीं बरत रही है? क्या स्टंट को लेकर पुलिस पूरी तरह उदासीन है? क्या सडक़ पर स्टंट करने वाले दूसरे राहगीरों के लिए खतरा नहीं बन रहे हैं? क्या ऐसे स्टंट सडक़ हादसों को न्योता नहीं दे रहे हैं? क्या जागरूकता का अभाव इस तरह के स्टंट की असली वजह है? क्या सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान बेअसर हैं? क्या खुद और दूसरों की जान को खतरे में डालने की छूट दी जा सकती है? क्या सरकार इस मामले को लेकर ठोस कदम उठाएगी?
देशभर में बाइक सवार युवक सडक़ों पर स्टंट करते दिखते हैं। लखनऊ में भी ऐसे युवकों की कमी नहीं है। यहां के जनेश्वर मिश्र पार्क फ्लाईओवर, आंबेडकर पार्क, लोहिया पथ और वीआईपी रोड पर रोजाना दर्जनों युवक स्टंट करते दिखते हैं। अवकाश के दिनों में यहां देर रात तक बाइक और कार स्टंट किए जाते हैं। हैरानी यह है कि पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई करने की बजाय मूकदर्शक बनी हुई है। यह स्थिति तब है जब पुलिस को ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश है। कई बार तो पुलिस के सामने भी युवक स्टंट करने लगते हैं। ये युवक बिना किसी सुरक्षा के इस प्रकार के स्टंट सडक़ों पर करते हैं। बाइक पर स्टंट करने वाले युवक हेलमेट तक नहीं लगाते हैं। ऐसी स्थिति में हुए हादसे में जान जाने का खतरा रहता है। सडक़ों पर फर्र्राटा भरते ये युवक आम लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं। कई बार स्टंटबाजों की कलाबाजी से घबराकर दूसरे बाइक सवार हादसे का शिकार हो जाते हैं। सरकार को चाहिए कि वह खुलेआम सडक़ पर स्टंट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करे। साथ ही ऐसे युवकों के अभिभावकों को भी कड़ी चेतावनी दी जानी चाहिए ताकि वे अपने बच्चों को स्टंट से होने वाले हादसों से चेता सकें और उनको जान जोखिम में डालने से रोक सकें। समाज में बढ़ते स्टंट के क्रेज को पुलिस कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान चलाकर ही रोका जा सकता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो स्थितियां विस्फोटक हो जाएंगी।

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