जिद… सच की- काशी में धमाके की धमकी के निहितार्थ

सवाल यह है कि क्या काशी में एक और आतंकी हमले की आशंका है? क्या पत्र किसी आतंकी संगठन की ओर से भेजा गया है या किसी सिरफिरे ने यह काम किया है? क्या आतंकी इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वे खुलेआम धमकी देकर वारदातों को अंजाम देने की हिम्मत करने लगे हैं? क्या उत्तर प्रदेश आतंकियों का पनाहगाह बनता जा रहा है?

Sanjay Sharma

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में धमाके की धमकी दी गई है। विश्वविख्यात संकट मोचन मंदिर को उड़ाने और 2006 से बड़ा हमला करने की बात कही गई है। धमकी भरा यह पत्र मंदिर के महंत को भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दी गई है। मंदिर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। वहीं खुफिया एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं। सवाल यह है कि क्या काशी में एक और आतंकी हमले की आशंका है? क्या पत्र किसी आतंकी संगठन की ओर से भेजा गया है या किसी सिरफिरे ने यह काम किया है? क्या आतंकी इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वे खुलेआम धमकी देकर वारदातों को अंजाम देने की हिम्मत करने लगे हैं? क्या उत्तर प्रदेश आतंकियों का पनाहगाह बनता जा रहा है? क्या इस पत्र को हल्के में लेने का जोखिम लिया जा सकता है? क्या पत्र के पीछे गहरी साजिश की बू आ रही है?
धर्मनगरी काशी हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रही है। वर्ष 2006 में यहां सिलसिलेवार बम धमाके किए गए थे। संकट मोचन मंदिर में हुए धमाके में सात लोगों की जान चली गई थी। इसके अलावा कैंट स्टेशन और दशाश्वमेध घाट पर भी धमाके हुए थे। इन धमाकों में कुल 11 लोगों की मौत हुई थी जबकि सौ से अधिक लोग जख्मी हुए थे। बनारस में ये तीनों ही इलाके बेहद भीड़ वाले हैं। यहां आतंकी भीड़ में घुसकर आसानी से वारदात को अंजाम दे सकते हैं। जाहिर है धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। पाकिस्तानी व कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों ने उत्तर प्रदेश में अपना जाल बिछा रखा है। यहां उनके स्लीपर सेल सक्रिय हैं। आतंकी पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपनी पनाहगाह बना रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई आतंकियों की गिरफ्तारी से इसकी पुष्टिï होती है। ये आतंकी अपने आकाओं के इशारे पर कहीं भी हमला करने को तैयार रहते हैं। यूपी में आतंकियों की सक्रियता का बड़ा कारण लचर खुफिया और पुलिस तंत्र है। लचर पुलिसिंग के कारण इन क्षेत्रों में आने वाले संदिग्धों पर नजर नहीं रखी जाती है और वे स्थानीय लोगों के बीच में आसानी से घुलमिल जाते हैं। ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, भीड़ हिंसक हो रही है और पुलिस का इकबाल खत्म हो रहा है, तब आतंकी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम तक पहुंचा सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वह प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कड़े कदम उठाए। स्थानीय खुफिया तंत्र को विकसित और मजबूत करे ताकि समय रहते जानकारियां मिल सकें और धमकी के इस पत्र को हल्के में न ले। यदि ऐसा हुआ तो काशी में 2006 को दोहराया भी जा सकता है।

 

Pin It