जिद… सच की- बुलंदशहर में भीड़ की हिंसा खतरे की घंटी

सवाल यह है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसक घटनाएं बढ़ती क्यों जा रही हैं? बुलंदशहर में अराजकता फैलाने के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या यह सोची समझी साजिश का नतीजा है? क्या भीड़तंत्र की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा है? क्या कानून व्यवस्था स्थापित करने में पुलिस तंत्र नाकाम साबित हो गया है? आखिर वे कौन लोग हैं जो भीड़ की हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं?

Sanjay Sharma

गोकशी की सूचना पर बुलंदशहर में भीड़ हिंसक हो गई। उग्र भीड़ ने पुलिस चौकी और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। मौके पर पहुंचे पुलिस इंस्पेक्टर को गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। गोलीबारी में एक युवक भी मारा गया। इस मामले में अभी तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि मुख्य आरोपी फरार है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। इन सबके बीच कई सवाल अनुत्तरित हैं? अहम सवाल यह है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसक घटनाएं बढ़ती क्यों जा रही हैं? बुलंदशहर में अराजकता फैलाने के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या यह सोची समझी साजिश का नतीजा है? क्या भीड़तंत्र की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा है? क्या कानून व्यवस्था स्थापित करने में पुलिस तंत्र नाकाम साबित हो गया है? आखिर वे कौन लोग हैं जो भीड़ की हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं? क्या गोरक्षा के नाम पर इंसानों का खून बहाने और कानून को हाथ में लेने की छूट किसी को दी जा सकती है? क्या सरकार इस घटना से कोई सबक लेगी?
प्रदेश में भीड़ की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। बुलंदशहर की घटना बेहद गंभीर है और यह सरकार के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। लोगों को शक के बिना पर मारने वाली भीड़ अब पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने लगी है। गोरक्षा के नाम पर हिंसा और अराजकता फैलायी जा रही है। यह स्थिति तब है जब भीड़तंत्र की हिंसा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष जुलाई में बेहद सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि भीड़तंत्र को कानून को रौंदने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। सरकारें इसे रोकने का पुख्ता इंतजाम करें। कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में भी भीड़ की हिंसा को रोकने को लेकर कई आदेश-निर्देश जारी किए गए थे लेकिन इसका असर दूर-दूर तक नहीं दिखाई पड़ रहा है। यदि कोर्ट के आदेशों पर कायदे से अमल किया जाता तो यह स्थिति नहीं उत्पन्न होती। गोरक्षा के नाम पर अराजकतत्वों ने प्रदेश को हिंसा की आग में झोंकने की पूरी कोशिश की है। कुछ लोगों ने भीड़ को भडक़ाया। सरकार को बुलंदशहर में हुई हिंसा से सबक लेने की जरूरत है। यदि सरकार ऐसे अराजकतत्वों से निपटना चाहती है तो उसे सबसे पहले इनकी पहचान करनी होगी। प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को जमीन पर उतारना होगा। इसके अलावा हिंसा के दोषियों को जल्द से जल्द और कठोर सजा दिलाना सुनिश्चित करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार दोनों के लिए घातक साबित होगा।

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