लखनऊ महोत्सव: साहित्य, स्वाद और कारीगरी पर फिदा राजधानीवासी

  • देश-विदेश से भी पहुंचे पर्यटक
  • सर्द मौसम में लोगों को गर्माहट दे रही नवाबी चाय

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नवाबों का शहर इन दिनों लखनऊ महोत्सव से गुलजार है। स्मृति उपवन में चल रहा महोत्सव एक आयोजन नहीं बल्कि स्वाद, साहित्य और कारीगरी का संगम भी है और इस पर हर राजधानीवासी फिदा हैं। संगीत की मधुर स्वर लहरियां भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। बच्चों के लिए भी यहां बहुत कुछ है। महोत्सव के देखने देश-विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं। सर्द मौसम में नवाबी चाय लोगों को गर्माहट और जायका दोनों दे रही है।
महोत्सव में प्रवेश करते ही फिजा में एक साथ कई रंग नजर आने लगते हैं। एक ओर कवि सम्मेलन से लेकर सामाजिक समस्याओं पर गोष्ठिïयां हो रही हैं तो दूसरी ओर संगीत की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। जायका भी पीछे नहीं है। राजस्थानी मूंग की पकोड़ी से लेकर बंगाल की मशहूर रोस्टेड फिश तक का जायका लोग ले रहे हैं। इन सबमें खास है लखनवी नवाबी चाय स्टॉल। कुल्हड़ वाली नवाबी चाय आगन्तुकों को भरपूर आनंद दे रही है। स्टॉल के संचालक मनोज कुमार बताते हैं कि हम लोगों को अच्छी चाय पिलाना चाहते हैं। चाय बनाने में मसाले वाली चाय का इस्तेमाल किया जाता है। चाय का आनन्द ले रहे आनंद शर्मा का कहना है कि यह स्टॉल काफी लोकप्रिय है और कुल्हड़ की चाय वाकई नवाबी स्वाद दे रही है।
लजीज व्यंजन भी
फूड सेक्शन में गुजरते ही आपको यहां खाने की कई तरह की खुशबू अपनी ओर आकर्षित करेगी। यहां वेज और नॉनवेज दोनों तरह के व्यंजन उपलब्ध हैं। राजस्थानी मूंग की पकौड़ी, गुजरात के तमाम फूड्स और दिल्ली के वेज कबाब पराठे का स्वाद लेने से लोग अपने को रोक नहीं पा रहे हैं। नॉनवेज में फिश बर्गर, फीस रोल, फिश बिरियानी, लखनवी कबाब जैसे तमाम व्यजंन उपलब्ध हैं।
खुर्जा की क्रॉकरी का कमाल
दूधिया रोशनी में चमकती खुर्जा क्रॉकरी को देखकर लोगों के कदम थम से जाते हैं। क्रॉकरी सेक्शन में यहां बहुत कुछ हैं। मसलन कप, प्लेट, गुलदस्ते आदि। कारीगर मोहम्मद चांद बताते हैं कि वह बीते कई वर्षों से इस काम को कर रहे हैं। उनके पिता भी इसी पेशे से जुड़े हैं। भारत समेत विदेशों तक में इसकी मांग है।
अलग हटकर है सहारनपुर का फर्नीचर
फर्नीचर सेक्शन में एक से बढक़र एक कारीगरी का नमूना देखने को मिलता है। लडक़ी के नक्काशीदार सामानों को देखकर किसी का भी मनमुग्ध हो सकता है। मोहम्मद फुरकान बताते हैं कि घरेलू और अन्य प्रयोग में आने वाले फर्नीचर देवदार की लकडिय़ों से तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इसमें महीन और नक्काशी का काम किया जाता है।

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