जिद… सच की प्रदेश में रक्षक ही बन रहे भक्षक

सवाल यह है कि क्या ऐसे अपराधी किस्म के पुलिसकर्मियों के भरोसे सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करेगी? जब पुलिसकर्मी ही लूट और हत्या जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देंगे तो अपराधों पर लगाम कैसे लगेगी? क्या ऐसी घटनाओं के पीछे पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार जिम्मेदार है? क्या ऐसे पुलिसकर्मियों को आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है?

Sanjay Sharma

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करीब डेढ़ दर्जन पुलिसकर्मियों ने एक सर्राफा कारोबारी को वाहन चेकिंग के दौरान रोककर लूट लिया। गोपनीय जांच में घटना सही पाई गई और एक इंस्पेक्टर व दो दारोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया। कुछ दिन पहले दो पुलिसकर्मियों ने कार न रोकने पर एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मार हत्या कर दी थी। अहम सवाल यह है कि क्या ऐसे अपराधी किस्म के पुलिसकर्मियों के भरोसे सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करेगी? जब पुलिसकर्मी ही लूट और हत्या जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देंगे तो अपराधों पर लगाम कैसे लगेगी? क्या ऐसी घटनाओं के पीछे पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार जिम्मेदार है? क्या ऐसे पुलिसकर्मियों को आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है? क्या मित्र पुलिसिंग महज एक छलावा है? क्या पुलिसकर्मी अनुशासन का पाठ भूलकर पैसे के लिए अपराध करने पर उतारू हो गए हैं? क्या पुलिस विभाग में आमूल परिवर्तन की जरूरत है?
प्रदेश में कानून के राज पर सवाल उठने लगे हैं। रक्षक ही भक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। पुलिसकर्मी अपराध की राह पर चल पड़े हैं। आम आदमी पुलिस के नाम से कांपता है। थाने पर शिकायत लेकर जाने वाले गरीबों को दुत्कार कर भगा दिया जाता है। कई बार अधिकारियों के कहने के बाद भी रिपोर्ट नहीं लिखी जाती है। अपराधियों को पकडऩे की जगह तमाम पुलिसकर्मी उनसे साठगांठ कर मोटा माल कमा रहे हैं। वे अपराधियों से पैसा लेकर पीडि़त से मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाते हैं। बात नहीं मानने पर फंसाने की धमकी दी जाती है। ठेले और रेहड़ी वालों से वसूली की जा रही है। पुलिसकर्मियों की शह पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे हो रहे हैं। अवैध शराब का धंधा चल रहा है। विभाग में भ्रष्टïाचार इस कदर व्याप्त है कि पुलिसकर्मी सरेराह लूटपाट कर रहे हैं। सर्राफा कारोबारी से लूट की घटना इसका ताजा उदाहरण है। जब राजधानी में पुलिस का यह हाल है तो अन्य जिलों का अंदाजा लगाया जा सकता है। जाहिर है ऐसे पुलिसकर्मियों के भरोसे प्रदेश में कानून व्यवस्था स्थापित करने की उम्मीद बेमानी है। सभी पुलिसकर्मी ऐसे नहीं है बावजूद इसके एक मछली तालाब को गंदा करने के लिए काफी है और पुलिस विभाग में ऐसी तमाम मछलियां हैं। यदि सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना चाहती है तो उसे तत्काल ऐसे पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त करने के लिए कोई फुल प्रूफ योजना बनानी चाहिए वरना यह सरकार और जनता दोनों के लिए घातक साबित होगी।

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