कांगला फोर्र्ट के रक्षक हैं मिथकीय गार्डियन गॉड

गीताश्री णिपुर का 16वीं शताब्दी का बना कांगला फोर्ट (राजा खागेमबा ने बनवाया था)यहां के निवासियों के दिल दिमाग में विशेष जगह रखता है।
इम्फाल शहर के बीचोबीच और मणिपुर नदी के किनारे बना यह किला और राजवंश का इतिहास उनके दिलों में बसता है। उससे उनका वो इतिहास जुड़ा है जिसे अंग्रेजों ने तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया और किले के अंदर बने गोविंद टेंपल के गुंबदों पर जड़ा सोना भी नोंच ले गए। यह किला बरसों तक वीरान रहा। जगह-जगह से टूटा और बिखरा हुआ। अपने राजा की कुछ चीजें बचा रखी हैं जिनमें एक होली बोट यानी विशालकाय पवित्र नाव है जिसमें राजा अपने लश्कर के साथ बैठते थे, जब नदी में नौका दौड़ खेल का आयोजन होता था। अंग्रेजों ने जो तबाही मचाई, उसके बाद जो बचा, उसे सहेज लिया यहां के प्रशासन और स्थानीय निवासियों ने, जो आज भी इस किले को एक पवित्र स्थान मानते हैं। तबाही के बाद किले का पुनर्निर्माण किया गया, कुछ पुरानी दीवारें बच गईं। हमारे साथ दिल्ली से आई एक पत्रकार बोल पड़ती हैं अंग्रेज हमारे देश से बहुत सोना लूट ले गए। बैट्री कार पर किला घुमाते हुए मालयम कहती हैं कि ले जाने दो उन्हें, हमारे यहां कौन सा सोने की कमी है! बोलते हुए उसका चेहरा दिपदिपा रहा था। मानो अपने प्रदेश की समृद्धि पर खासा गर्वीली हो उठी थी। कालांतर में मंदिर किले से बाहर शहर में बनाया गया जहां आज भी कृष्ण की पूजा होती है।

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