नौ सौ करोड़ खर्च होने के बाद भी नहीं हो सका गोमती का उद्धार, प्रदूषण से सिसक रही नदी

  • लोगों के आचमन लायक भी नहीं है पानी
  • नदी में रोजाना गिर रहा लाखों लीटर गंदा पानी
  • एसटीपी भी क्षमता के मुताबिक नहीं कर रहे काम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भाजपा सरकार फिलहाल नदी सफाई के मामले में घडिय़ाली आंसू बहा रही है। बात चाहे गंगा सफाई की हो या गोमती सफाई की, दोनों ही नदियों की सफाई महज कथनी तक सीमित हैं। गोमती नदी में प्रदूषण रोकने के लिए टुकड़ों में खर्च किये गये करोड़ों के बजट ने नदी सफाई की रुपरेखा तो बनायी लेकिन न तो गोमती प्रदूषित होने से बच पायी और न ही साफ हो पायी। ऐसे में नदियों की सफाई को लेकर दशकों से किये जा रहे उपाय निरर्थक ही साबित हो रहे हैं। गोमती आज भी अपने उद्धार का इंतजार कर रही है। वह प्रदूषण से कराह रही है।
गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने के उपायों की हकीकत यह है कि अभी भी 319 लाख लीटर सीवर और नाले का गंदा पानी सीधे गोमती में गिर रहा है। जल निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में रोजाना करीब 720 लाख लीटर (एमएलडी) सीवर व गंदा पानी निकल रहा है। जिसमें से केवल 401 एमएलडी ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) साफ हो पा रहा है। एसटीपी में साफ हो रहे सीवेज व गंदे पानी का यह सरकारी आंकड़ा भी हकीकत में सही नहीं है। शहर में नाले के गंदे पानी को साफ करने के लिए जिन एसटीपी का निर्माण कराया गया है वे मौजूदा समय तक पूरी क्षमता से कार्य कर ही नहीं सके हैं। ऐसे में नालों का कितना गंदा पानी एसटीपी से साफ होकर गोमती में जा रहा है। यह संबंधित विभाग ही जाने। योगी सरकार ने तो सत्ता संभालते ही गोमती का उद्धार करने की घोषणा कर दी थी। बीते वर्ष 27 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रिवर फ्रंट पहुंचे थे। यहां उन्होंने गोमती से उठती बदबू पर चिंता जताई थी। साथ ही घोषणा की थी कि वे छह महीने में गोमती के पानी को आचमन करने लायक बना देंगे। इस घोषणा को किए हुए डेढ़ साल से अधिक होने जा रहा है लेकिन गोमती की दुर्दशा में रत्ती भर की कमी नहीं आई है। ऐसी स्थिति में गोमती की सफाई को लेकर अब तक खर्च हुये 900 करोड़ से अधिक के बजट की हकीकत सारी कहानी बयां कर रही है।

 

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