शहर को छोडि़ए, अपने कार्यालय के आसपास का अतिक्रमण हटाने में भी नाकाम नगर निगम

  • मुख्यालय के आसपास अतिक्रमणकारियों का है कब्जा, कहीं वाहन तो कहीं ठेले वाले जमाए हैं डेरा 
  • फुटपाथ का खत्म हो गया नामोनिशान, सडक़ पर हमेशा बना रहता है जाम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निगम पर दीया तले अंधेरा की कहावत सटीक बैठती है। शहर की छोडि़ए, अपने कार्यालय के आसपास का अतिक्रमण हटाने में नगर निगम प्रशासन नाकाब साबित हो रहा है। हालांकि अफसर राजधानी से अतिक्रमण हटाने के लंबे-चौड़े दावे करते रहते हैं। लापरवाही का आलम यह है कि नगर निगम मुख्यालय के पास सडक़ों पर जमकर अतिक्रमण किया गया है। इसके कारण जाम की स्थिति हमेशा बनी रहती है। हैरत यह है कि रोजाना इसी मार्ग से जाने वाले निगम अफसरों को यह अतिक्रमण नहीं दिखता है।
राजधानी की सडक़ों से अतिक्रमण कब हटेगा, यह सवाल सडक़ पर अतिक्रमण और जाम की समस्या से जूझते लोगों को भले टीसती हो, लेकिन शहर में अतिक्रमण रोकने के लिए जिम्मेदार नगर निगम को इससे कोई वास्ता नहीं है। यही कारण है कि लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय से लेकर नावेल्टी चौराहे तक जबरदस्त अतिक्रमण रहता है। यहां सडक़ किनारे दुकान चलाने वालों का आलम यह है कि उन्हें सडक़ों या फुटपाथ से कोई मतलब नहीं है। चौराहे पर चौतरफा अतिक्रमण है। सभी बरामदों में खान-पान के काउंटर लगे हैं। बरामदों में भट्ठी जला कर खान-पान की दुकानें धड़ल्ले से चलायी जा रही हैं। इन अतिक्रमण करने वालों को न तो नगर निगम का डर है न ही यातायात व्यवस्था के पटरी से उतरने की चिंता। वैसे तो अतिक्रमण से पूरा शहर पटा है लेकिन लालबाग चौराहा नगर निगम मुख्यालय के पास है और इस रास्ते से नगर निगम के आला अफसरों का आवागमन होता रहता है। अफसर अक्सर जाम में फंस जाते हैं लेकिन अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते। शहर के अधिकांश क्षेत्रों में सडक़ें अतिक्रमण से घिरी हैं, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार नगर निगम कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। नगर निगम के सामने त्रिलोक नाथ रोड काफी चौड़ी है लेकिन सुबह होते ही सडक़ अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण चौड़ी हो जाती है। भाजपा कार्यालय से नगर निगम मुख्यालय तक जबरदस्त अतिक्रमण देखा जा सकता है। अभी कुछ दिन पहले नगर निगम ने यातायात पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाया था लेकिन शाम होते ही दोबारा अतिक्रमण हो जाता है।

पार्षद भी पीछे नहीं
शहर में दूरदराज ही नहीं बल्कि नगर निगम मुख्यालय के ठीक सामने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। यहां तरतीब खड़ी गाडिय़ों को देखा जा सकता है जबकि नगर निगम मुख्यालय के ठीक सामने वाहन पार्किंग की व्यवस्था है। लेकिन लोग पार्किंग का प्रयोग करने के बजाय नगर निगम के सामने वाहन खड़ा कर देते हैं। इसमें नगर निगम के पार्षद भी पीछे नहीं हैं। ऐसे में आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है।

ठंडे बस्ते में जुर्माना वसूली

सडक़ पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की नींद कभी-कभी ही टूटती है। इस दौरान नगर निगम का प्रवर्तन दस्ता अभियान चलाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। अभियान चलाते वक्त निगम के अधिकारी अतिक्रमणकारियों को दोबारा अतिक्रमण करने पर नोटिस देने और एफआईआर कराने की चेतावनी देते हैं लेकिन दोबारा अतिक्रमण होने के बावजूद नगर निगम किसी भी अतिक्रमणकारी के खिलाफ एफआईआर कराना तो दूर जुर्माना तक नहीं वसूलता है।

 

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