एक ऐसा किला, जो रह गया कुंवारा

अलवर। वैसे तो राजस्थान पर्यटकों का स्थल है। यहां हर जिले में कई पहलू अभी तक अनछुए हैं। कई जगहें ऐसी हैं जिन्हें आसपास के लोगों के अलावा कोई नहीं जानता। यहां पर ऐसे किले हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। आज उन्हीं जगहों में से एक पहलू के बारे में आपको बताने जा रहे हंै।
जी हां, राजस्थान में एक ऐसा किला भी है जहां से कुत्ता दागता था दुश्मन पर गोले। आप शायद यकीन ना करें लेकिन ये सच है। राजस्थान के अलवर जिले के बाला किले के पास पहाडी पर बने तोप-खाने में ऐसा होता था। बाला किला जिसे अलवर किले के नाम से भी जाना जाता है, अलवर शहर में एक पहाड़ी पर स्थित है। इस किले का निर्माण ईसा पश्चात वर्ष 1550 में हसन खान मेवाती ने करवाया था। यह स्मारक अपने चिनाई के माक और भव्य संरचनात्मक डिजाइन के लिए प्रसिद्घ है। इस किले से करीब दो सौ मीटर पहले सडक़ के किनारे खंडहरनुमा इमारत दिखाई देती है। यह तोप का कारखाना है। इसमें राजाओं के शासनकाल के दौरान तोप का निर्माण किया जाता था। यहां की बनी हुई तोपों का परीक्षण यहीं होता था। खास बात यह है कि इन परीक्षण में तोपों के फटने और उनके साइड इफेक्ट के बड़े नुकसान थे। ऐसे में एक कुत्ते को ट्रेंड किया गया, जिसका नाम था विक्टर। यह कुत्ता तोप चलाने के बाद वहां बने पानी के कुंड में तेजी से छलांग लगा देता था।
एक बार यहां एशिया महाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी तोप बनाई गई। इसका परीक्षण भी विक्टर को ही करना था। इससे पहले कि विक्टर तोप चलाने पर कुंड में कूदता, तोप फट गई। इस विस्फोट से विक्टर की मौत हो गई। विक्टर की याद में तोपखाना परिसर में उसकी समाधि बनाई गई। इसके साथ ही विक्टर का नाम इतिहास में दर्ज हो गया। इस महल के बीच रास्ते में करनी माता का मंदिर भी पड़ता है। पुराने समय में यहीं से चढ़ जाते थे। आज भी लोग इस मंदिर में पैदल भी चढ़ते हैं। ऐसा बताया जाता है कि इस किले पर कभी युद्ध नही हुआ और इस पर किसी ने हमला करके कब्जा नहीं किया इसलिए इसे बाला किला कहते हैं। वहीं इस किले पर कभी युद्ध नहीं होने के कारण इसे कुंवारा किला कहते हैं। वर्तमान में यह पर्यटक स्थल के रूप में विकसित है।

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