जिद… सच की- मक्का किसान और सरकार की नीति

सवाल यह है कि क्या सरकार की इस नीति से मक्का किसानों को राहत मिलेगी? क्या उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा? क्या अन्य योजनाओं की तरह यह योजना भी लालफीताशाही का शिकार नहीं हो जाएगी? क्या खरीद केंद्रों में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने कोई कार्ययोजना बनाई है? क्या सरकार इस योजना का ईमानदारी से पालन करा सकेगी?

Sanjay Sharma

रप्रदेश सरकार ने पहली बार मक्का किसानों की सुध ली है। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1700 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। साथ ही उतराई-छनाई के लिए भी बीस रुपये प्रति क्विंटल किसान को दिए जाएंगे। इस वर्ष सरकार ने एक लाख मीट्रिक टन मक्का खरीदने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश के बीस जिलों में मक्का क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे और खरीद की जाएगी। सवाल यह है कि क्या सरकार की इस नीति से मक्का किसानों को राहत मिलेगी? क्या उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा? क्या अन्य योजनाओं की तरह यह योजना भी लालफीताशाही का शिकार नहीं हो जाएगी? क्या खरीद केंद्रों में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने कोई कार्ययोजना बनाई है? क्या सरकार इस योजना का ईमानदारी से पालन करा सकेगी?
खरीफ फसलों में धान के बाद मक्का प्रदेश की मुख्य फसल है। यूपी में मक्का का काफी उत्पादन होता है। कम लागत के कारण किसानों का रुझान मक्के की खेती की ओर बढ़ा है। इसके अवशेषों का प्रयोग चारे के रूप में भी किया जाता है। उत्पादन के बावजूद प्रदेश के मक्का किसान को मुनाफे के नाम पर बहुत छोटी रकम मिल पाती है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा मक्के का समर्थन मूल्य घोषित करना और इसकी खरीद का निर्णय लेना सराहनीय कदम है। मक्के की खरीद अलीगढ़, फीरोजाबाद, कन्नौज, एटा, मैनपुरी, कासगंज, बदायूं, बहराइच, फर्रुखाबाद, इटावा, हरदोई, कानपुर नगर, जौनपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, गोंडा, बलिया, बुलंदशहर, ललितपुर व श्रावस्ती में होगी। यहां क्रय केंद्र खोले जाएंगे। बावजूद इसके सरकार को इस नीति को जमीन पर उतारने केे लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। इसका बड़ा कारण बिचौलिए हैं। ये बिचौलिए व्यापारियों से साठ-गांठ कर किसानों से औने-पौने दामों पर मक्का खरीद लेते हैं। वहीं क्रय केंद्रों की स्थिति बेहद खराब है। पिछले दिनों कई केंद्रों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। गन्ना किसान अपनी फसल बाजार में कम दामों में बेचने को मजबूर हुए। वहीं धान खरीद के लिए बनाए गए कई केंद्रों पर ताले पड़े हैं। ऐसे में मक्का किसानों के सामने भी यही समस्या आएगी। यदि ऐसा हुआ तो सरकार की नीति का किसानों को कोई फायदा नहीं मिलेगा। यदि सरकार किसानों का भला करना चाहती है तो उसे क्रय केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। साथ ही पारदर्शिता से किसानों से उनकी फसलों की खरीद सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले बिचौलियों और अधिकारियों पर शिकंजा भी कसना होगा।

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