कहां जाई का करी

शहर को चमकाने का जिम्मा संभाल रहे साहब लोग सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। स्वच्छता के नाम पर करोड़ों खर्च कर चुके हैं लेकिर काम ढेले का नहीं हुआ है। हर जगह गंदगी का अंबार लगा रहता है। अब जब पता चला है कि स्वच्छता सर्वेक्षण होना है तो सक्रिय हुए हैं। डस्टबिन गिने जा रहे हैं। खोजा जा रहा है कि आखिर कहां-कहां रखवाए थे। बेचारे डस्टबिन जहां रखे थे वहीं रखे हैं और कुड़े से अटे पड़े हैं। मजाल कोई उनको वहां से खिसका दे। दाढ़ी वाले वजीर ने जब यह नजारा देखा तो आगबबूला हो गए। खुद सफाई की कमान संभाल ली है। अनुभवी आदमी है। जानते हैं बिना डंडा चलाए यहां कुछ नहीं होने वाला है। सो भ्रमण पर है।

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