ये है बनारस नगरिया तू देख बबुआ

अपने बनारसी बाबुओं की चांदी हो गई है। सब जल क्रीडा का आनंद ले रहे हैं। मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं, गलती से ही सही अच्छा आदमी चुन लिया है। कम से कम उनका ख्याल तो रखता है। जब आता है कुछ न कुछ देकर ही जाता है। पांच साल में ब्याज समेत दे गया है जी। इस बार तो हद ही कर दी। सौगातों की बारिश कर दी है। देश का पहला बंदरगाह बनवा दिया और बाकायदा गंगा पर पानी का जहाज चलवा दिया। अरे अभी देखते रहो जी। चुनाव आने वाले हैं। कुर्सी बचानी है तो अभी बहुत कुछ मिलेगा। बस झोली फैलाए रहो। ये बनारस है जी सबका हिसाब बराबर कर देता है।

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