वन्यजीवों से इतनी क्रूरता क्यों?

सवाल यह है कि वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच हो रही इस जंग का क्या परिणाम होगाï? क्या इस स्थिति के लिए खुद मनुष्य जिम्मेदार है? क्या घटते जंगलों ने वन्यजीवों को मनुष्य की आबादी की ओर आने के लिए बाध्य कर दिया है? क्या अनियंत्रित विकास ने वन्यजीवों की रिहाइश उनसे छीन ली है? क्या वन्यजीवों के खात्मे से प्रकृति का संतुलन नहीं बिगड़ेगा ? क्या अब अभयारण्य और रिजर्व में भी वन्यजीव सुरक्षित नहीं रह गए हैं?

Sanjay Sharma

लखीमपुर स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व के एक बाघ ने एक युवक पर हमला कर दिया। वह युवक को खींचकर जंगल ले जाने लगा। इसी दौरान ग्रामीणों ने बाघ को चारों ओर से घेर लिया और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। हमले के शिकार युवक ने भी अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया है। वन्यजीव और मनुष्य की यह जंग एक बानगी भर है। यह घटना अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है। सवाल यह है कि वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच हो रही इस जंग का क्या परिणाम होगाï? क्या इस स्थिति के लिए खुद मनुष्य जिम्मेदार है? क्या घटते जंगलों ने वन्यजीवों को मनुष्य की आबादी की ओर आने के लिए बाध्य कर दिया है? क्या अनियंत्रित विकास ने वन्यजीवों की रिहाइश उनसे छीन ली है? क्या वन्यजीवों के खात्मे से प्रकृति का संतुलन नहीं बिगड़ेगा ? क्या अब अभयारण्य और रिजर्व में भी वन्यजीव सुरक्षित नहीं रह गए हैं?
जंगल से लगे क्षेत्रों में वन्यजीवों से मनुष्यों का टकराव बढ़ता जा रहा है। बढ़ती आबादी और अनियंत्रित विकास इसकी असली वजह हैं। जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई जंगलों को काटकर बस्तियां बसाई जाने लगीं। शहर बसाए गए। इसका सीधा असर जंगल में रहने वाले पशु-पक्षियों पर पड़ा। जंगल का पारिस्थिकी तंत्र पूरी तरह असंतुलित हो गया। लिहाजा मांसाहारी पशुओं को पर्याप्त शिकार नहीं मिल पा रहा है। यही नहीं सरकार की ओर बनाए गए अभयारण्य और रिजर्व भी मांसाहारी पशुओं के लिए मुफीद नहीं रह गए हैं। यहां तैनात कर्मचारियों की मिलीभगत से वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा है। इसके चलते भारी संख्या में चीतल, हिरण और बारहसिंघा का शिकार हो रहा है। ये वन्यजीव दूसरे मांसाहारी जीवों मसलन बाघ और तेंदुए का भोजन होते हैं। ऐसी स्थिति में यहां भी भोजन की कमी हो गई है। इसके कारण ये शिकारी बस्तियों में घुसने लगे हैं। कई बार तो बाघ जैसे शिकारी पशु न केवल आदमियों पर हमले कर देते हैं बल्कि उनको अपना भोजन भी बना लेते हैं। इसके अलावा ये पशु मवेशियों को भी मारकर खा रहे हैं। इसके कारण स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा होता है और वे इन पशुओं को मार डालते हैं। सरकार यदि वन्यजीवों को संरक्षित और संवर्धित करना चाहती है तो उसे वन नीति में बदलाव करने होंगे। यहां हो रहे अवैध शिकार पर सख्ती से प्रतिबंध लगाना होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। अभयारण्य और रिजर्व में वन्य पशुओं के भोजन का पर्याप्त इंतजाम करना होगा। साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो एक दिन वन्यजीव समाप्त हो जाएंगे और इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा।

 

Pin It