पुलिस ही लगा रही कानून-व्यवस्था को पलीता, अपराधियों के हौसले बुलंद

  • पीडि़तों पर दबाव बना मामले को कर रहे रफा-दफा
  • अधिकारियों और कोर्ट के आदेश के बिना नहीं दर्ज हो रहे मुकदमे
  • अपराधियों के इशारे पर पीडि़तों को ही प्रताडि़त कर रही पुलिस

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। तमाम दावों के बावजूद राजधानी की कानून-व्यवस्था पटरी पर आती नहीं दिख रही है। यहां पुलिस ही अपराधियों को शह दे रही है और उनके इशारे पर पीडि़तों को प्रताडि़त कर रही है। हाल यह है कि बिना अफसरों और कोर्ट के आदेश के बिना थानों में रिपोर्ट नहीं दर्ज की जा रही है। वहीं, तमाम वारदातों की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। 
प्रदेश में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए जहां प्रदेश सरकार अपना पूरा जोर लगा रही है, वहीं पुलिस के ही लोग इसमें पलीता लगाने में जुटे हैं। राजधानी समेत पूरे प्रदेश में दिन प्रतिदिन बढ़ रहे अपराधों को रोकने में असफल साबित हो रहा पुलिस महकमा इसके लिए स्वयं जिम्मेदार है। अपराध में शामिल अपराधियों को कहीं न कहीं पुलिस विभाग के सिपाही से लेकर अधिकारियों तक का संरक्षण मिला हुआ है। पुलिस विभाग की इस कारगुजारी से पीडि़त को न्याय नहीं मिल पाता है। वहीं संरक्षण मिलने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि अपराधी बेखौफ होकर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। राजधानी के ट्रांस गोमती में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। यहां बीते छह महीनों में हुए अधिकांश अपराधों में पुलिस को जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कई मामलों में विवेचना लम्बित है तो कई मामलों में पुलिस ने अपराधी के साथ मिलकर मामले को दबा दिया।
दूसरी ओर पीडि़त अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काटकर थक चुके हैं। इन पीडि़तों को पता है कि पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ के कारण उनको न्याय नहीं मिल रहा है। ट्रांस गोमती के मडिय़ांव इलाके में कई बार जेल जा चुके व पांच हजार के इनामी बदमाश और उसके साथियों ने मिलकर आईआईएम रोड के सहारा एक्सटेंशन के करीब ड्रीम रेस्टोरेंट में अपने दोस्त के जन्मदिन की पार्टी मनाने आए एक छात्र को मामूली कहासुनी होने पर रेस्टोरेंट से निकालकर रोड पर जमकर पीटा, जिससे उसके नाक की हड्डी टूट गई और सिर और माथे में काफी चोटें आईं। बावजूद इसके भिठौली चौकी और मडिय़ांव थाने की पुलिस ने दबंग बदमाशों के आकाओं के दबाव में आकर सही धाराओं में एफआईआर दर्ज न करके एनसीआर (पुलिस के हस्तक्षेप न करने योग्य अपराध) दर्ज कर मामले को रफा-दफा कर दिया। इसके बाद पीडि़त एसएसपी के कैंप कार्यालय के चक्कर काटते रहे। एसएसपी ने इंस्पेक्टर मडिय़ांव प्रदीप सिंह को फटकार लगाई और मामले को सही धाराओं में दर्ज करके अभियुक्तों को गिरफ्तार करके जेल भेजने की हिदायत दी, लेकिन मडिय़ांव पुलिस ने उल्टा पीडि़त पर ही दबाव बनाती रही। यही नहीं मडिय़ांव पुलिस ने मुख्य अभियुक्त को पकड़ा और सही धाराओं के बजाय 151 की धारा में चालान करके जमानत दिला दी। हैरत की बात यह है कि एसएसपी कलानिधि नैथानी इस बात की सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कर सके। मडिय़ांव पुलिस की इस कारगुजारी की भरपाई शुक्रवार की देर शाम जानकीपुरम इलाके में बस्ती रोड निवासी युवक सूरज एवं मिर्जा पुलिया निवासी शोएब को चुकानी पड़ी। इन अपराधियों ने देर रात कहासुनी के दौरान इन लोगों की लाठी डंडों से जमकर पिटाई की। इनका आरोप है कि अपराधी असलहा से फायर करते हुए फरार हो गए।

कोर्ट के हस्तक्षेप पर दर्ज किया मुकदमा

अपनी अकड़ के लिए पहचाने जाने वाले इंस्पेक्टर बृजेश कुमार राय ने कुछ महीने पहले विभूति खंड थाने में तैनाती के दौरान गोरखपुर की भाजपा विधायक संगीता यादव की कार से वकील की बाइक में ठोकर मारने के मामले में पीडि़त को दौड़ाते रहे और विधायक की तरफ से वकील पर कार की चाबी लूटने का मुकदमा दर्ज कर दिया। कई दिनों बाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस ने वकील की एफआईआर दर्ज की।

एसएसपी को भी किया गुमराह
बीते दिनों जानकीपुरम थाने के इंस्पेक्टर रहे पीके झा एवं उनके दारोगा एवं सिपाहियों ने एक अपराधी के जेल से छूटने के बाद उसे उठा लिया और कई दिनों तक थाने की छत पर बैठाए रहे, इसके बाद इन जिम्मेदारोंं ने एसएससी को गुमराह करके उस पर 25000 हजार का इनाम भी घोषित करवा दिया और एनकाउंटर की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन खुलासा होने के बाद उसका चालान किया गया।

ऐसे गांठते हैं रौब

राजधानी में तैनात कई थानेदार और सीओ अपने को मुख्यमंत्री का करीबी बताते हैं। वहीं दूसरी ओर कई खुद को कद्दावर मंत्रियों का करीब बता कर पीडि़तों पर रौब गांठते हैं और उन्हें प्रताडि़त करते हैं। ये अपराधियों को शह भी दे रहे हैं, लिहाजा वारदातों में तेजी से इजाफा हो रहा है।

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