राजधानी में धड़ल्ले से चल रहा मिनरल वाटर का धंधा, नहीं की जा रही है शुद्धता की जांच

  • गली-मोहल्लों तक में लगाए जा चुके हैं आरओ प्लांट लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़
  • प्लांट्स की नहीं की जा रही निगरानी, मोटी कमाई करने में जुटे व्यवसायी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी समेत आसपास के तमाम क्षेत्रों में मिनरल वाटर सप्लाई का काम जोरों पर है। पिछले कुछ सालों में अचानक मिनरल वाटर की खपत में बढ़ोत्तरी हुई है। इन सबके बीच बिना अनुमति मिनरल वाटर प्लांट घरों में लगाकर मानकों के विपरीत पानी का धंधा चल रहा है। इन सबके पीछे सरकारी मशीनरी की लापरवाही है। एक ओर जलकल विभाग जनता को शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराने का दावा करता है। वही, तमाम सरकारी विभाग, सार्वजनिक स्थान व घरों में मल्टीनेशनल कंपनियों के आरओ लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि या तो जलकल विभाग के दावे खोखले हैं या लोग बेवजह मल्टीनेशनल कंपनियों के आरओ लगवा रहे हैं।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मिनरल वाटर का धंधा जोरों पर चल रहा है। गली-मोहल्लों में खुल गए आरओ प्लांट (रिवर्स ऑस्मोसिस वॉटर)से बड़े पैमाने पर केनों में भरकर पानी की आपूर्ति की जा रही है। शहर में रोजाना लाखों लीटर मिनरल वाटर की खपत है लेकिन ये पानी कितना शुद्ध है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। सबसे बड़ी बात इतने बढ़े स्तर पर चल रहे आरओ वाटर के इस व्यवसाय की निगरानी नहीं की जा रही है। ऐसे में इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि सप्लायर्स जो पानी सप्लाई कर रहे हैं उसकी शुद्धता की कितनी गारंटी है। क्या वास्तव में ये पानी सभी पैमानों पर खरा है। अब तो डॉक्टर्स भी बाहर से आने वाले आरओ का पानी पीने के लोगों को मना करने लगे हैं। हालांकि घर में लगे आरओ फिल्टर में कोई आपत्ति नहीं है। जिस पानी को लोग शुद्धता के चक्कर में खरीद रहे हैं उसकी जांच तक नहीं की जा रही है। शुद्धता व स्वच्छता के नमूने कभी लिए ही नहीं गए। न ही वॉटर प्लांट की जांच की गई। आरओ के नाम पर सादा पानी भी मिलाकर बड़े पैमाने पर बेचा जा रहा है। आलम यह है कि गली मोहल्लों में ई-रिक्शा, छोटा हाथी व अन्य संसाधनों के द्वारा जार में भरा पानी पहुंचाया जा रहा है। आलम यह है कि कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां बेनामी कंपनियों ने वाटर सप्लाई का काम ले रखा है। कई क्वालिटी में पानी उपलब्ध निर्मल नीर संचालक राजेंद्र शाह के मुताबिक शहर में बिकने वाला पानी कई क्वालिटी में है। इसमें खर्च और उपलब्धता की मांग को लेकर पूर्ति करनी पड़ रही है। हालांकि सादा पानी भी मिलाया जा रहा है। ये स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है। कुछ दिनों पहले समाजसेवी अशोक कुमार भार्गव ने इस संबंध में सवाल उठाया था। उनकी ओर से इस सम्बन्ध में जलकल विभाग में आरटीआई डाली गयी और इसको लेकर सवाल पूछे गए। जवाब मिला कि जलकल विभाग की ओर से जनता को उपलब्ध कराया जा रहा जल पूर्ण रूप से शुद्ध है। इसको दोबारा शुद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

20 लीटर क्षमता की केन बाजार में 20-30 रुपए में बेची जा रही है।

घर-घर हो रही सप्लाई

एक अनुमान के अनुसार शहर में रोजाना लगभग 7500 केन सप्लाई की जाती है। 20 लीटर क्षमता की केन बाजार में 20-30 रुपए में बेची जा रही है। ऐसे में 2 लाख 25 हजार रुपए से ज्यादा का रोजाना कारोबार हो रहा है। यही नहीं इसके अलावा शादी, बारात, बर्थडे पार्टी समेत सामाजिक कार्यक्रमों में भी मिनरल वाटर की खपत हो रही है। ऐसे वाटर प्लांट बिना जांच और शुद्धता के संचालित हैं।

अशुद्ध पानी कर सकता है बीमार

पीने का पानी कीटाणुरहित होना चाहिए। उसमें नुकसान पहुंचाने वाले रसायन, गन्ध और स्वाद भी नहीं होना चाहिए। असुरक्षित व प्रदूषित पीने का पानी कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है। बारिश के दिनों में पीने का पानी साफ नहीं रहता है, लिहाजा इस मौसम में पानी का विशेष ध्यान रखें। साफ पानी न पीने से हैजा, उल्टी (गेस्ट्रोएन्ट्राइटिस), टायफायड, पोलियो, पीलिया, दस्त और त्वचा में संक्रमण हो सकता है।

ऐसे तैयार किया जाता है मिनरल वाटर

  • पानी में गंदगी और तलछट रेत को फिल्टर करना।
  • बारीक कार्बन, फि ल्टर पानी से क्लोरीन और नए ऑर्गेनिक्स गंध के जरिए गंदगी को कम करना।
  • हानिकारक केमिकल को खत्म करना।
  • खनिज को जरूरत के हिसाब से मेंटेन रखना।

ये हैं मानक

  • फ्लोराइड 0.5 से 1.5 मिलीग्राम
  • घुलनशील लवण 500 से 1500 मिग्रा
  • नाइट्रेट 0 से 45 मिलीग्राम
  • राइड 10 से 500 मिलीग्राम
  • पीएचपीए 6.5 से 8.5 मिलीग्राम
  • (डब्ल्यूएचओ के तैयार किए गए मानकों के अनुसार)

 

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