भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पर कोर्ट की सख्ती के मायने

सवाल यह है कि क्या पूरा सरकारी तंत्र भ्रष्टïाचार की चपेट में है? क्या परीक्षाओं में शुचिता और पारदर्शिता बेमानी हो चुकी हंै? क्या पैसे व जुगाड़ से सरकारी नौकरी पायी जा सकती है? क्या भर्ती परीक्षाएं योग्यता का मापदंड नहीं रह गई हैं? क्या चयन प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टïाचार से नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं हो रहा है? क्या सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टïाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता है?

Sanjay sharma

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बडिय़ों पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है। साथ ही सीबीआई से इसकी रिपोर्ट छह माह में पेश करने को कहा है। हालांकि सरकार इस आदेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे का मन बना चुकी है। बावजूद इसके कई सवाल अनुत्तरित है। सवाल यह है कि क्या पूरा सरकारी तंत्र भ्रष्टïाचार की चपेट में है? क्या परीक्षाओं में शुचिता और पारदर्शिता बेमानी हो चुकी हैं? क्या पैसे व जुगाड़ से सरकारी नौकरी पायी जा सकती है? क्या भर्ती परीक्षाएं योग्यता का मापदंड नहीं रह गई हैं? क्या चयन प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टïाचार से नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं हो रहा है? क्या सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टïाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता है?
प्रदेश सरकार ने सहायक शिक्षकों के 68 हजार 500 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया था। इसके तहत चालीस हजार से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसी दौरान परीक्षा में हुई गड़बडिय़ों को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ पर अंकित बार कोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे हैं और कई कॉपियों के पेज फटे थे। चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत एक बानगी भर है। सच यह है कि अधिकांश सरकारी भर्ती में पारदर्शिता और शुचिता का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। भर्ती परीक्षाओं में पैसा लेकर नकल कराने और कॉपी बदलने का खेल जारी है। नकल माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब हो रहा है। परीक्षा के पहले पेपर लीक कर दिया जाता है। पिछले दिनों सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कर दिया गया था और नकल कराते तीन फर्जी निरीक्षकों को गिरफ्तार किया गया था। कुल मिलाकर पैसे के दम पर पेपर से लेकर कॉपी बदलने तक की पूरी व्यवस्था है। केवल भर्ती परीक्षाएं ही क्यों बोर्ड से लेकर इंजीनियरिंग और मेडिकल तक की परीक्षाओं में नकल कराने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। जाहिर है लोग जुगाड़ और पैसे के बल पर नौकरियां हासिल कर रहे हैं। इसके कारण योग्य लोगों में निराशा पैदा हो रही है। उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। यदि इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो आम नागरिकों का ऐसी परीक्षाओं से विश्वास उठ जाएगा। हालांकि सीबीआई जांच के बाद ही स्पष्टï हो सकेगा कि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में धांधली हुई है या नहीं लेकिन सरकार को परीक्षाओं की शुचिता बरकरार रखने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे वरना स्थितियां विस्फोटक हो जाएंगी।

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