जनेश्वर मिश्र पार्क में कुत्तों का आतंक हाथ पर हाथ धरे बैठे एलडीए के अफसर

  • कई लोगों पर कर चुके हैं हमले, सुरक्षा कर्मी भी नियंत्रण लगाने में नाकाम
  • देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों में खराब हो रही विश्वस्तरीय पार्क की छवि
  • पार्क में कई घटनाओं के बावजूद नहीं जागे जिम्मेदार, हादसे की आशंका बढ़ी

विनय शंकर अवस्थी
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अफसरों की लापरवाही के कारण गोमती नगर विस्तार स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क की सूरत बिगड़ती जा रही है। सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही के कारण पार्क में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। ये कुत्ते यहां घूमने आए कई लोगों पर हमला कर चुके हैं। सुरक्षा कर्मी भी इन पर नियंत्रण लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इसके कारण देश-विदेश से यहां आने वाले पर्यटकों के बीच पार्क की छवि खराब हो रही है। हैरत की बात यह है कि कई घटनाओं के बावजूद एलडीए के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैैठे हैं।
विश्व स्तरीय जनेश्वर मिश्र पार्क में मार्निंग और इवनिंग वाक करने के अलावा रोजाना काफी संख्या में देशी विदेशी पर्यटक भी पहुंचते हैं। यहां घूमने वाले लोगों के बीच आवारा कुत्तों का आतंक है। इसकी वजह यह है कि यहां घूमने वालों पर कई कुत्तों ने हमले किए हैं। पार्क में आने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर कुत्तों के हमलों को लेकर खतरा बना हुआ है। एलडीए के कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। उनकी ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा जिससे इन कुत्तों को पार्क से बाहर किया जा सके। जिम्मेदार अफसर भी पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुस्त नजर आ रहे हैं। यह स्थिति तब है जब जनेश्वर मिश्र पार्क की गिनती विश्वस्तरीय पार्कों में है। पार्क की खूबसूरती और उसमें मौजूद सुविधाओं का लुत्फ उठाने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां आते हैं। पार्क में मॉर्निंग वॉक पर आने वाले लोगों को यहां घूम रहे कुत्ते परेशान करते हैं। पार्क में जाने वाले लोगों के मुताबिक सुबह और शाम को यहां अक्सर कुत्ते दौड़ा लेते हैं। ये कई लोगों को काट भी चुके हैं। अंधेरा छाने पर कुत्तों की दहशत बढ़ जाती है। वहीं एलडीए अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा है।

एशिया का सबसे बड़ा पार्क

6 अगरस्त 2012 को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र पार्क की नींव रखी थी। यह एशिया का सबसे बड़ा पार्क माना जाता है, क्योंकि इसका क्षेत्रफल 376 एकड़ है। इस पार्क को बनवाने की लागत 168 करोड़ रूपये है। सपा सरकार में यह पार्क सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था। इस पार्क का नाम छोटे लोहिया के नाम से विख्यात जनेश्वर मिश्र के नाम पर है। पार्क में तीन किलोमीटर की लम्बी झील बनी हुई है, जिसमें गंडोला बोट से घूमने का अलग ही आनंद है। वहीं पार्क में तिरंगा लगा हुआ है, जिसकी ऊंचाई 210 फुट है। तिरंगा लगाने वाले पोल में 25 टन लोहा लगा है। इतना ही नहीं पार्क यहां 100 फुट ऊंचा फव्वारा भी लगा है। इन सब चीजों को देखने के लिए लोग दूर-दराज से यहां आते हैं। बावजूद इसके सुरक्षा का इंतजाम नहीं है।

एलडीए से पत्र आते हैं लेकिन पार्क नगर निगम की सीमा से बाहर है। ऐसे में पार्क से कुत्तों को पकडऩे की जिम्मेदारी नगर निगम की नहीं है।
अरविन्द कुमार राव, पशु चिकित्साधिकारी , नगर निगम

हो चुकी हैं गंभीर घटनाएं

  •  17 सितंबर 2018: जनेश्वर मिश्र पार्क में दोस्तों संग घूमने आया कृष्णा (5वर्ष) पैर फिसलने से झील में गिर पड़ा था। चीख पुकार पर पहुंचे एक सफाई कर्मचारी ने झील से उसे बाहर निकाला। बच्चे को लोहिया अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई थी।
  •  6 नवम्बर 2015: जनेश्वर मिश्र पार्क की झील में डूबने से विकासनगर के शुभम (22) की मौत हो गई। शुभम के साथ झील में गिरे उसके दो दोस्तों को बचा लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था, इसकी वजह से शुभम को समय से नहीं निकाला जा सका।

कागजी कार्रवाई कर रहे अफसर

जनेश्वर मिश्र पार्क में कुत्तों के आतंक की शिकायत पर एलडीए भी बेहद सुस्त है। एलडीए के अफसर शिकायतों को नगर निगम भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हंै। पार्क में कुत्तों के आतंक को लेकर कई बार एलडीए के अफसर नगर निगम को कुत्ता पकडऩे के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।

 

 

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