कुंभ से पहले राम मंदिर आंदोलन को हवा देने की तैयारी, दिल्ली में लगा संतों का जमावड़ा

  • हिंदू धर्म के 125 संप्रदायों के तीन हजार से अधिक संत कर रहे शिरकत
  • मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने से संत समाज नाराज
  • संघ पहले ही सरकार को दे चुका है मंदिर आंदोलन की चेतावनी
  • सरकार से कानून लाकर मंदिर बनाने की कर रहे हैं मांग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर पर सियासत गरमाती जा रही है। प्रयागराज में अगले साल आयोजित होने वाले कुंभ से पहले राम मंदिर आंदोलन को हवा देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिर निर्माण पर चर्चा के लिए आज से दो दिवसीय साधु-संतों की बैठक धर्मादेश दिल्ली के तालकटोरा में शुरू हो गई है। यहां देश भर से प्रमुख संत इकट्ठा हो रहे हैं। बैठक में हिंदू धर्म के करीब 125 संप्रदायों के संत हिस्सा ले रहे हैं। कुंभ से पहले साधु-संतों का यह बड़ा जमावड़ा है। इसमें मंदिर निर्माण पर प्रस्ताव लाया जाएगा।
राम मंदिर आंदोलन के बाद हिन्दू धर्म के 125 सम्प्रदायों की ये बैठक पहली बार हो रही है। वीएचपी से जुड़े साधु-संत पहले ही राम मंदिर आंदोलन को तेज करने के लिए सांसदों को घेरने का ऐलान कर चुके हैं। दूसरी ओर आरएसएस के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने भी आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि कोर्ट ने करोड़ो हिंदुओं की भावनाओं का अपमान किया है। मंदिर निर्माण में बहुत देर हो चुकी है और अगर जरूरत पड़ी तो 1992 की तरह मंदिर आंदोलन भी करेंगे। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रनन्द सरस्वती का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने संतों को निराश किया है। इस निराशा के बाद सन्त क्या फैसला लेंगे ये कोई नहीं कह सकता लेकिन कोई बड़ा फैसला जरूर होगा। उन्होंने कहा कि प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए यह भी साफ हो जाएगा कि कौन राम मंदिर के पक्ष में है और कौन विरोध में। इससे किसी दल पर यह आरोप नहीं लगेगा कि वह मंदिर के लिए कानून लेकर आया। राम भक्त और हिंदुओं ने राम मंदिर के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं। स्वामी वागीश स्वरूप काशी ने कहा कि देश के अलग-अलग राष्ट्रीय मसलों पर संत समाज चर्चा करेगा और सबसे अहम राम मंदिर के मुद्दे पर धर्म आदेश जारी किया जाएगा। संत सरकार को मंदिर निर्माण के लिए आदेश देंगे। अगर सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में कानून लेकर नहीं आती तो कुंभ के दौरान साधु-संत बैठक करेंगे और फैसला करेंगे।

मंदिर निर्माण से कम पर नहीं राजी

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आरएसएस और साधु-संत लगातार सरकार पर दबाव बनाने में जुटे हैं। ऐसे में योगी सरकार दिवाली में अयोध्या में भगवान राम की 151 मीटर ऊंची तांबे की प्रतिमा बनाने का ऐलान करने जा रही है, लेकिन साधु-संत राम मंदिर निर्माण से कम पर राजी नहीं दिख रहे हैं।

निर्माण की तारीख नहीं बता सकते: केशव

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा बयान आया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि राम मंदिर पर हम कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये मामला अभी अदालत में है। उन्होंने ये भी कहा कि मंदिर निर्माण की हम तारीख भी नहीं बता सकते हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में डिप्टी सीएम ने कहा कि दबाव या प्रभाव की बात नहीं है, जो मामला कोर्ट में है उस पर हम कुछ नहीं कह सकते हैं लेकिन अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर जरूर बनेगा, कब बनेगा ये तिथि हम नहीं बता सकते हैं। ये हमारे हाथ में नहीं है, ये कोर्ट के हाथ में है। केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि अब रामलला की जन्मभूमि पर कोई बाबर के नाम की इमारत और स्मारक नहीं बना सकेगा। डिप्टी सीएम ने कहा कि वे जरूर जानना चाहेंगे कि जनेऊधारी राहुल गांधी और भगवान विष्णु का मंदिर बनाने की घोषणा करने वाले अखिलेश यादव का इस बारे में क्या कहना है।

तीन सत्रों में होगी बैठक

संतों की इस बैठक को धर्मादेश नाम दिया गया है। दो दिवसीय बैठक में तीन सत्र होंगे। पहला सत्र श्रद्धांजलि का होगा। इसमें राम मंदिर आंदोलन में अयोध्या में गोलियों से मारे गए कारसेवकों को श्रद्धांजलि के अलावा संसद के सामने गोलियों का शिकार हुए गौरक्षकों को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी। दूसरे सत्र में धर्मांतरण के नए-नए तरीके अपना रही मिशनरियों पर वक्ता अपनी बात रखेंगे और ढ़ोंगी बाबाओं के खिलाफ प्रस्ताव रखा जाएगा। तीसरा सत्र कल होगा और इसमें तमाम बड़े संत और शंकराचार्य सबरीमाला पर व्याख्यान देंगे और राम मंदिर पर प्रस्ताव भी रखा जाएगा।

न नाम बताया न गिरफ्तारी की और हो गया यूपी पुलिस का गुडवर्क

  • अमेरिका के मियामी एयरपोर्ट पर हमले की धमकी देने का मामला
  • जालौन का निवासी है युवक सुधार की संभावना बता पुलिस नहीं कर रही नाम उजागर
  • बिट क्वाइन के नुकसान से आक्रोशित होकर युवक ने दी थी धमकी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अमेरिका के मियामी एयरपोर्ट पर कॉल करके एके-47 और ग्रेनेड से हमला करने की धमकी देने वाले युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है लेकिन न तो उसे गिरफ्तार किया है न ही उसके नाम का खुलासा किया है। पुलिस युवक की उम्र और सुधार की संभावना बता कर नाम नहीं उजागर कर रही है।
डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि युवक द्वारा कई ऐसे कॉल किए गए हैं जिसे गंभीरता से लिया गया है। उसके आईपी ऐड्रेस के आधार पर जब उसे लोकेट कर पूछताछ की गई तो कई चीजें सामने आईं। आरोपी ने बताया कि उसने अपने पिता से पैसे लेकर 1000 यूएस डॉलर के बिट क्वाइन खरीदे और उसके दाम बढऩे से वह खुश होता रहा। इस बीच उसकी चैटिंग किसी व्यक्ति से हुई जिसने उसे ज्यादा फायदा देने का लालच देकर सारे पैसे हड़प लिए। उसने इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी। लेकिन एफबीआई को छद्म नाम से कॉल कर व ई-मेल द्वारा जानकारी दी। एफबीआई से अपेक्षित सहयोग न मिलने पर इसने योजना बनाई व मियामी एयरपोर्ट यूएसए कॉल करके हमले की धमकी दी। इसने कहा कि मैं एके 47, ग्रेनेड, सुसाइड बेल्ट लेकर आऊंगा और सबको मार दूंगा। एफबीआई से कहो मुझसे बात करे। कॉल करने के लिए इसने वीओएलपी का सहारा लिया। वह दो अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक लगातार कॉल करता रहा। सहयोगी संगठनों ने यूपी एटीएस से मदद मांगी। डीजीपी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और सुसंगत धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। धाराएं ऐसी हैं जिसमें गिरफ्तारी की नियमत: आवश्यकता नहीं है। अत: गिरफ्तारी न करते हुए चार्ज शीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी। डीजीपी का तर्क है कि उसकी उम्र 18 वर्ष 3 माह है और उसके अंदर सुधार की संभावना को देखते हुए उसका नाम नहीं जारी किया जा रहा है।
सवाल यह है कि पुलिस की यह कैसी कार्रवाई है जिसमें न तो गिरफ्तारी हुई न नाम का खुलासा किया गया है। कहीं ऐसा तो नहीं की पुलिस नाम खोलने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रही है।

 

Pin It