पाक-चीन बस सेवा की कूटनीति और भारत

सवाल यह है कि क्या चीन बस सेवा के जरिए पीओके में दखल देकर दक्षिण एशिया की शांति में खलल डालने की कोशिश कर रहा है? क्या चीन की इस चाल से भारत से उसके संबंध और खराब नहीं होंगे? क्या भारत इस मामले में केवल आपत्ति दर्ज कराने तक सीमित रहेगा या कड़े कदम भी उठाएगा? क्या बस सेवा के जरिए पाकिस्तान पीओके में अपने अवैध कब्जे पर चीन की मुहर लगवाना चाहता है?

Sanjay Sharma

पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन ने भारत को घेरने की एक और चाल चली है। इस महीने की तीन तारीख से लाहौर और चीन के काशगर प्रांत के बीच नई बस सेवा शुरू होने जा रही है। यह बस पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बने आर्थिक गलियारे से होकर गुजरेगी। भारत ने इसे देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया है। वहीं चीन का कहना है कि इस बस सेवा का क्षेत्रीय विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। यह चीन व पाकिस्तान के बीच एक आर्थिक सहयोग परियोजना है। सवाल यह है कि क्या चीन बस सेवा के जरिए पीओके में दखल देकर दक्षिण एशिया की शांति में खलल डालने की कोशिश कर रहा है? क्या चीन की इस चाल से भारत से उसके संबंध और खराब नहीं होंगे? क्या भारत इस मामले में केवल आपत्ति दर्ज कराने तक सीमित रहेगा या कड़े कदम भी उठाएगा? क्या बस सेवा के जरिए पाकिस्तान पीओके में अपने अवैध कब्जे पर चीन की मुहर लगवाना चाहता है? क्या इसके जरिए चीन दक्षिण चीन सागर में भारत की बढ़ती दिलचस्पी को कम करने का दबाव बना रहा है? क्या पीओके में हस्तक्षेप एक और युद्ध की आहट दे रहा है?
भारत के अपने दोनों पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से संबंध मधुर नहीं रहे हैं। पाकिस्तान न केवल भारत में आतंकी गतिविधियों को संचालित करता है बल्कि सीमा पार से गोलीबारी भी करता रहता है। वह कश्मीर को हड़पने की कोशिश में लगा है। वहीं पाक की खस्ता आर्थिक हालत का फायदा उठाकर चीन ने पाक हुक्मरानों से आर्थिक गलियारा बनाने की स्वीकृति ले ली। गलियारे का नक्शा इस तरह बनाया गया है कि चीन सीधे-सीधे कश्मीर स्थित भारतीय सीमा तक पहुंच सके। पाक ने इसे इसलिए स्वीकार कर लिया है ताकि उसे भारत के खिलाफ चीन का साथ मिल सके। साथ ही उसकी मंशा अपने कब्जे वाले कश्मीर पर चीन से मुहर लगवाना भी है। भारत हमेशा से पीओके में किसी तीसरे देश की मौजूदगी का विरोध करता रहा है। हालांकि चीन पीओके को भारत-पाक का मुद्दा मानता है और इसमें दखल नहीं देने की बात करता है लेकिन यह कूटनीति की भाषा है। सच यह है कि बस सेवा पीओके में तीसरे देश का सीधा हस्तक्षेप है। चीन, दक्षिण चीन सागर में भारत की बढ़ती दिलचस्पी से भी आशंकित है और बस सेवा के जरिए उस पर दबाव बनाना चाहता है। इससे भारत-चीन के संबंधों में तल्खी बढ़ेगी। बावजूद इसके भारत को चीन के खिलाफ प्रभावी कूटनीतिक कदम उठाने होंगे। मसलन, उसे तिब्बत की आजादी और दक्षिण चीन सागर में चीनी कब्जे को प्रभावी तरीके से उठाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो एक और युद्ध की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

संपादक को पत्र…

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अवधेश कुमार मौर्य
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