धनतेरस

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल (लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त)में की जानी चाहिए। पूजा सूर्यास्त और दिन के अंत के अगले एक घंटे और 43 मिनट के बाद शुरू की जा सकती है। धनतेरस पूजा को धनवंतरी त्रयोदशी,धनवंतरी जयंती पूजा, यमद्वीप और धनत्रयोदशी के रूप में भी कहा जाता है।
यह पूरे भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी पांच दिन लम्बे दीपावली समारोह के पहले दिन का त्यौहार है। धनतेरस का अर्थ है, हिन्दू चन्द्र कलैण्डर के अनुसार, अश्चिन के महीने में 13 वें दिन ( कृष्ण पक्ष में, अंधेरे पखवाड़े) धन की पूजा। इस दिन देवी लक्ष्मी की भी पूजा होती है और इस दिन कुछ बहुमूल्य वस्तु खरीद कर घर लाने की भी परम्परा है इस मिथक के साथ कि देवी लक्ष्मी घर आयेगी। यह घर के लिये भाग्य और समृद्धि लाता है।

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