जिद… सच की- सीबीआई की साख पर सवालिया निशान

अहम सवाल यह है कि क्या भ्रष्टïाचार के खिलाफ गठित की गई सीबीआई भी इसकी चपेट में आ गई है? क्या जांच एजेंसी के अधिकारी मोटी रिश्वत लेकर मामले को मैनेज करने लगे हैं? क्या अफसरों के बीच रिश्वत को लेकर घमासान मचा है या कोई अन्य वजहें भी हैं? क्या घूसखोरी के आरोपों से घिरे सीबीआई अधिकारियों से भ्रष्टïाचार पर नियंत्रण लगाने की उम्मीद की जा सकती है?

SAnjay Sharma

भ्रष्टïाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठिïत जांच एजेंसी सीबीआई में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जांच एजेंसी ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, अधिकारी देवेंद्र समेत चार लोगों के खिलाफ मांस कारोबारी मोईन कुरैशी को क्लीन चिट देने के मामले में दो करोड़ की रिश्वत लेने का मुकदमा दर्ज किया है। डिप्टी एसपी देवेद्र को गिरफ्तार किया गया है। वहीं अस्थाना ने भी सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। प्रधानमंत्री ने जांच एजेंसी के प्रमुख वर्मा और विशेष निदेशक अस्थाना को तलब किया है। अहम सवाल यह है कि क्या भ्रष्टïाचार के खिलाफ गठित की गई सीबीआई भी इसकी चपेट में आ गई है? क्या जांच एजेंसी के अधिकारी मोटी रिश्वत लेकर मामले को मैनेज करने लगे हैं? क्या अफसरों के बीच रिश्वत को लेकर घमासान मचा है या कोई अन्य वजहें भी हैं? क्या घूसखोरी के आरोपों से घिरे सीबीआई अधिकारियों से भ्रष्टïाचार पर नियंत्रण लगाने की उम्मीद की जा सकती है? क्या इस घटना ने देश में सीबीआई की साख और उसकी निष्पक्षता पर धब्बा लगाने का काम नहीं किया है? क्या शीर्ष जांच एजेंसी में रिश्वतखोरी का मामला भ्रष्टïाचार के खिलाफ सरकार की मुहिम को झटका नहीं है?
सीबीआई का गठन भ्रष्टïाचार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे के लिए किया गया था। घोटालों और उलझे हत्याकांडों का पर्दाफाश कर सीबीआई ने खूब नाम कमाया। एजेंसी की इन्हीं कार्रवाईयों के चलते जनता में उसकी साख एक निष्पक्ष जांच एजेंसी के तौर पर स्थापित हुई। हालांकि सियासी दल बार-बार सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे। सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई की तुलना पिजड़े में बंद तोते से की थी। बावजूद इसके जनता के बीच सीबीआई की साख में रत्ती भर कमी नहीं आई। आज भी वह किसी भी जटिल केस को सीबीआई को सौंपने की मांग करती है। इसके बावजूद ताजा रिश्वतकांड ने पूरे देश को हिला दिया है। यह तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि हकीकत क्या है और क्या वाकई मांस कारोबारी को क्लीन चिट देने के एवज में पैसा लिया गया। फिर भी इस प्रकरण ने सीबीआई की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है। इससे सरकार की भ्रष्टïाचार के खिलाफ मुहिम को भी झटका लगा है। चर्चा यह भी है कि एफआईआर दोनों अधिकारियों के बीच डेढ़ साल से चले आ रहे अहम के टकराव का परिणाम है। फिलहाल इस प्रकरण ने सरकार और सीबीआई दोनों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इसका दूर तक असर दिखेगा। विपक्ष भी इस मामले पर मोदी सरकार को निश्चित तौर पर घेरेगा।

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