जवान बेटे की मौत से टूट चुका पिता अब न्याय की आस में मर रहा है तिल-तिल

  • डेढ़ साल से लगा रहा पुलिस के चक्कर, डीजीपी से डीएम तक लगा चुका है गुहार
  • दो दर्जन बार दे चुका है प्रार्थना-पत्र, दो बार हुआ पोस्टमॉर्टम लेकिन नहीं सुलझी गुत्थी
  • पहली रिपोर्ट में मौत का कारण बताया हादसा तो एफएसएल रिपोर्ट ने जताई हत्या की आशंका

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बेटे की मौत ने एक पिता को जहां तोड़ दिया है वहीं सरकारी कार्य प्रणाली उसे तिल-तिल कर मार रही है। इस मामले में शव का दो बार पोस्टमॉर्टम हुआ वहीं दो दर्जन से अधिक बार बुजुर्ग पिता ने प्रार्थना-पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई लेकिन नतीजा सिफर रहा।
जनपद कानपुर नगर निवासी महेश चन्द्र शर्मा पुलिस प्रशासन के नकारेपन का दंश बीते एक डेढ़ वर्ष से झेल रहे हैं। 18 वर्षीय बेटे सौरभ की मौत के पीछे आपराधिक षडय़ंत्र का अंदेशा होने के बावजूद प्रशासनिक अमला जिम्मेदारी की रस्मअदायगी कर रहा है। शिवराजपुर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम मानाताला निवासी पिता के जख्म वक्त भी भरे तो कैसे? बीते वर्ष 30 मई को सौरभ की मौत हो गई थी। पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सकों ने मौत का कारण हादसा बताया था जबकि विधि विज्ञान प्रयोगशाला, एफएसएल की रिपोर्ट हत्या की ओर इशारा कर रही है। यह प्रकरण पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट के बीच उलझा है। सौरभ 30 मई 2017 की सुबह घर से निकला था। दोपहर में परिवार को सूचना मिली कि वह गंगा में डूब गया। हालांकि उसे बखूबी तैरना आता था। मौके पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों को पानी में उतारा, लेकिन शव नहीं मिला। दो दिन बाद एक जून की रात मछुआरों के जाल में सौरभ का शव फंसा। शव को गंगा किनारे लाकर महेश को सूचना दी गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया तो डाक्टरों ने रिपोर्ट में डूबने के कारण दम घुटने से मौत की पुष्टि की। इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट से महेश संतुष्ट नहीं थे। उन्हें बेटे की हत्या का शक था। इसी के चलते महेश ने बेटे का शव गंगा किनारे सरैया घाट पर सुरक्षित दफनाया और बेटे के गुनहगारों को सजा दिलाने के लिये प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देना शुरू किया।
20 जुलाई 2017 को महेश ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर बेटे का पुन: पोस्टमार्टम कराने की अपील की। जिलाधिकारी ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश किया तो महेश बेटे का शव कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम हाउस तक ले गये। चार अगस्त 2017 को पांच चिकित्सकों के पैनल ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी भी हुई। चिकित्सकों के पैनल ने शव विघटित होने के आधार पर कोई भी सलाह देना असंभव बताया और शव परीक्षण के लिये विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ भेजने की संस्तुति की। हालांकि, पांच चिकित्सकों के पैनल ने डूबने से हुर्ई मौत पर शव में पाये जाने वाले छह लक्षणों का जिक्र जरूर किया। 16 फरवरी 2018 को एफएसएल रिपोर्ट आई। इस रिपोर्ट पर शिवराजपुर पुलिस का कहना है कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट में कुछ भिन्नता है। इसीलिये एफएसएल रिपोर्ट देने वाले चिकित्सक से लिखित में बयान मांगा गया है। उनका बयान मिलते ही आगे की कार्रवाई की जायेगी।
चिंतनीय है कि इन सभी ने पीडि़त को महज न्याय के आश्वासन की घुट्टी पिला कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली। एफआईआर दर्ज हुये डेढ़ वर्ष बीत गये, बावजूद इसके अभी तक किसी नामजद की गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर सकी है।

  • 30 मई 2017 सुबह घर से निकला 18 वर्षीय बेटा सौरभ 
  • 20 जुलाई 2017 को महेश ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बेटे का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अपील की 
  • 04 अगस्त 2017 को पांच चिकित्सकों के पैनल ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया
  • 16 फरवरी 2018 को एफएसएल रिपोर्ट आई

मिल रहा कोरा आश्वासन: महेश

पीडि़त महेश ने बताया कि इस दौरान जिलाधिकारी कानपुर नगर ही एक ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने दायित्व का निर्वहन करते हुये सहयोग किया। बेटे के शव का दोबारा पोस्टमार्टम उन्हीं के प्रयासों से संभव हुआ। अन्यथा न्याय पाने की यह लड़ाई कब की खत्म हो चुकी होती। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अब तक दो दर्जन प्रार्थना पत्र दे चुका हूं। हर जगह से महज कोरे आश्वासन मिले, न्याय नहीं। एफआईआर दर्ज हुये डेढ़ वर्ष बीत गया, बावजूद इसके अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। बकौल महेश, सीएम पोर्टल पर भी शिकातय की गई थी। इसके अलावा जिलाधिकारी, डीआईजी, एडीजी समेत दो दर्जन अधिकारियों को कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया है।

क्या कहना है अधिवक्ता का

पीडि़त को न्याय दिलाने के लिये बीते डेढ़ वर्ष से महेश चन्द्र शर्मा के हर कदम पर साथ रहे अधिवक्ता विजय कुमार दीक्षित बताते हैं कि एफएसएल रिपोर्ट में लिखा है कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छह लक्षण नहीं बताये गये हैं। यह एंटीमार्टम ड्राउनिंग अर्थात मृत्यु पूर्व डूबने से हुई मौत न होकर पोस्टमार्टम ड्राउनिंग मृत्यु के पश्चात डूबना हो सकता है। मौत का कारण सदमा या कोमा बताया गया है। ऐसे में पहली मेडिकल रिपोर्ट भी सवालों के घेरे में है।

घटनाक्रम

30 मई 2017 को सौरभ की मौत हुई
23 जुलाई 2017
एफआईआर दर्ज हुई
04 अगस्त 2017
दोबारा पोस्टमार्टम हुआ
05 अगस्त 2017
शव एफएसएल, लखनऊ भेजा गया
08 अगस्त 2017
शव वापस कानपुर लाया गया
15 अक्टूबर 2017
विवेचना सचेंडी थाना हस्तांतरित
16 फरवरी 2018
एफएसएल से रिपोर्ट थाना सचेंडी
पहुंची। वहां से थाना शिवराजपुर भेज दी गई
29 मार्च 2018
जांच सचेंडी से पुन: शिवराजपुर वापस हुई

 

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