मां का शव खोजना तो दूर मासूम बेटी को भी परिजनों से नहीं मिला सकी पुलिस

  • हत्यारोपी के साथ उत्तराखंड की खाक छानने के बाद खाली हाथ लौटी नाका पुलिस
  • परिजनों ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। हीरू सिंह हत्याकांड को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं। इस हत्याकांड में आरोपी पति दीपक कपूर को 48 घंटे की रिमांड पर लेकर नाका पुलिस उत्तराखंड में खाक छानती रही। बावजूद इसके पुलिस न तो हीरू का शव बरामद कर सकी और न उसकी मासूम बच्ची को परिजनों के सुपुर्द कर सकी। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही और किशोर न्याय बोर्ड की जानकारी न होने का आरोप लगाया है।
इंस्पेक्टर नाका विश्वजीत सिंह ने बताया कि आरोपी दीपक के बताए स्थानों पर लखीमपुर से लेकर खटीमा तक कई जगहों पर हीरू सिंह के शव की खोजबीन की गई। दीपक ने बताया कि रात का समय था इसलिए उसे ठीक से स्थान याद नहीं है। इसके बाद पुलिस खटीमा पहुंची। वहां से बुधवार सुबह देहरादून स्थित बाल संरक्षण गृह में बच्ची को लेने पहुंची। जहां बाल संरक्षण अधिकारियों ने कहा कि बच्ची उनके परिवारीजनों को सुपुर्द की जाएगी न कि पुलिस को। वहीं, हीरू सिंह के भाई महेंद्र और भांजी शुभी का आरोप है कि उन्हें जानकारी दिए बिना पुलिस देहरादून बाल संरक्षण गृह पहुंच गई। परिवारीजनों का आरोप है कि वहां जाकर पता चला कि बच्ची को लेने के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेंगी। उधम सिंह नगर सीडब्ल्यूसी की चेयरपर्सन डॉ. रजनीश बत्रा ने बताया कि चार सितंबर को खटीमा पुलिस बच्ची को लेकर उनकी संस्था में आई थी क्योंकि बाल संरक्षण गृह देहरादून में है इसलिए बच्ची को वहां भेज दिया गया था। लखनऊ पुलिस ने सीडब्ल्यूसी से संपर्क करने के बजाए सीधे बाल संरक्षण गृह चली गई। इस लिए वहां बच्ची को उनके सुपुर्द नहीं किया गया। बच्ची की सुपुर्दगी परिवारीजनों को की जाएगी। हालांकि परिवारीजन सीडब्ल्यूसी आए थे।

 

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