हे प्रभु! कब सुधरेंगे पंडित जी

शहर का विकास करने वाले विभाग के पंडित जी उर्फ छोटे साहब का कोई जवाब नहीं। चारों ओर ऐसा मायाजाल रच रखा है कि यदि राजा विक्रमादित्य का बेताल देख ले तो गश खाकर जमीन पर गिर पड़े। इस मायाजाल में वे आसामियों को फंसाकर दोनों हाथों से मलाई काट रहे हैं। आधे शहर में पंडित जी के इस गुण का डंका बजता है। इनकी आज्ञा के बिना मजाल कोई अपने सिर पर छत बना ले। बड़ी-बड़ी इमारतों के मालिक इनके आगे हाथ जोडक़र खड़े हो जाते हैं। पंडित जी लक्ष्मी के घनघोर पुजारी हैं। लिहाजा पंडित जी की कृपा पाने के लिए लोग लक्ष्मी के साथ उनकी परिक्रमा करते रहते हैं। हर महीने पंडित जी के चेले चढ़ावा चढ़ाते रहते हैं। उनके इस मायाजाल से बड़े साहब की हालात खराब हो रही है। सो इनके मायाजाल को देखकर सब यही कह रहे हैं, हे प्रभु! कब सुधरेंगे पंडित जी।

 

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