नाम बोलता है

आसन डोलता देख बाबाजी ने नया दांव चला है। उनके इस दांव से विरोधी नाराज हो गए हैं। सीधा हमला बोल दिया है। अरे भाई नाम ही बदला है। बदला क्या पुराने वाले नाम को ही पंजीकृत किया है। इस पर क्यों नाराज होते हो। अब बाबाजी को कौन समझाए कि नाम बदलने से क्या हकीकत बदल जाएगी। अगर बदलती है तो हर जगह का नाम बदल दीजिए। अरे भाई बाबाजी ने अपने सहयोगियों से वादा किया था। सो नाम बदल दिया। अब इसमें राजनीति खोजिए तो बाबाजी की सेहत पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल विरोधी दबे जुबान यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि कभी काम बोलता था, अब नाम बोलता है।

 

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