क्या से क्या हो गया

साइकिल वाले नेता जी और हाथी वाली मैडम काफी परेशान दिख रहे हैं। समझ नहीं आ रहा है कि इस नयी मुसीबत का सामना कैसे करें। अपने ही राह में कांटा बिछाने लगे हैं। सोचा था, इस बार कमल दल वालों को मजा चखा देंगे लेकिन अपने ही मामले को उल्टा करने पर उतारू हैं। लगता है चचा पूरी दुश्मनी निकालकर ही मानेंगे। पार्टी बना ली। अब कमल दल वालों से पींगे बढ़ा रहे हैं। चलो इनसे भी दो-दो हाथ कर लेते लेकिन अपने राजाजी को क्या कहे। अब उन्हें भी पार्टी बनाने का शौक पैदा हो गया है। लगता है मामला बिगाड़ कर ही मानेंगे। ये दोनों अपनी नाव पार करे न करे हमारी लुटिया डुबोकर ही दम लेंगे। मैडम भी इस नई बिसात को देखकर चौकन्नी हो गई हैं। राजनीति में सब होता है। यहां जिसको दांव मिलता है वह चित कर देता है।

 

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