राजधानी में सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान बेअसर, रोज हो रहे पांच हादसे

  • अस्पताल में हुई मौतों का आंकड़ा नहीं यातायात पुलिस के पास, दुर्घटना में रोज हो रही मौत
  • तेज गति, सडक़ों के गड्ढे और यातायात नियमों के उल्लंघन से बढ़ती जा रहीं हैं दुर्घटनाएं
  • गड्ढा मुक्त सडक़ों के दावे साबित हो रहे हवाई यातायात पुलिस नहीं लगा पा रही रोक

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में सडक़ हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन करीब पांच सडक़ हादसे होते हैं। सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान भी यहां बेअसर दिख रहा है। ये हादसे तेज गति से वाहन चलाने, सडक़ों पर गड्ढें और यातायात के नियमों का उल्लंघन करने की वजह से हो रहे हैं। वहीं यातायात पुलिस के पास हादसे के दौरान अस्पताल पहुंचे लोगों की मौतों का आंकड़ा नहीं है।
यातायात पुलिस, सामाजिक संगठन, एनसीसी कैडेट और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा समय-समय पर यातायात के प्रति अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है बावजूद सडक़ हादसों में कमी नहीं आ रही है। इसकी मुख्य वजह तेज गति और सडक़ों में पड़े गड्ढे हैं। सरकार के गड्ढा मुक्त सडक़ों के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब सडक़ों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों का बजट हर साल खर्च किया जाता है। बारिश के बाद स्थितियां और भी बदतर हो चुकी हैं। राजधानी की शायद ही कोई ऐसी सडक़ हो, जहां गड्ढे न हो। ये गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। तेज रफ्तार के दौरान ये गड्ढे दिखाई नहीं पड़ते हैं और हादसों का कारण बन जाते हैं। पिछले सालों का रिकार्ड देखे तो हर दिन औसतन दो लोगों की मौत हो रही है जबकि घायलों की संख्या तीन से अधिक हैं। यह आंकड़ा यातायात विभाग का है। सूत्रों की माने तो सडक़ हादसों के दौरान घटनास्थल पर जितने लोगों की मौत होती है, पुलिस अपने आंकड़ों में उतना ही दर्ज करती है। अस्पताल में हुई मौतों का आंकड़ा नहीं दर्ज करती है। यदि पुलिस के पास इनका भी रिकॉर्ड होता तो इसमें और वृद्धि हो जाएगी। इस वर्ष अगस्त तक राजधानी की सडक़ों पर करीब एक हजार सडक़ हादसे हुए। इन हादसों में 381 लोगों की मौत हो गई जबकि 627 लोग गम्भीर रूप से घायल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी सडक़ें जिन पर अधिकतम गति सीमा 60 किमी तय है, उन पर गड्ढे होना जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से तुलना करें तो यह आंकड़ा काफी है। सच यह है कि नगर निगम और पीडब्ल्यूडी गड्ढा मुक्त सडक़ें नहीं बना पा रहे हैं और पुलिस व ट्रैफिक पुलिस रफ्तार पर लगाम नहीं लगा पा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी सडक़ें जिन पर अधिकतम गति सीमा 60 किमी तय है, उन पर गड्ढे होना जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से तुलना करें तो यह आंकड़ा काफी ज्यादा है। सच यह है कि नगर निगम और पीडब्ल्यूडी गड्ढा मुक्त सडक़ें नहीं बना पा रहे हैं और पुलिस व ट्रैफिक पुलिस रफ्तार पर लगाम नहीं लगा पा रही है।

अगस्त तक राजधानी की सडक़ों पर करीब एक हजार सडक़ हादसे हुए। इन हादसों में करीब 381 लोगों की मौत हो गई जबकि 627 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

वर्ष         हादसे       मौतें
2014     1303       646
2015     1393       662
2016     1519       652
2017     1539      642
2018     1001      381
अगस्त तक

तेज गति और यातायात के नियमों का पालन नहीं करने के कारण हादसे होते हैं। हालांकि अभियान के दौरान लोग पुलिस के सामने सही तरीके से वाहन चलाते हंै लेकिन इसके बाद चालक तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हैं। विभाग सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करता है। इसके अलावा ऐसे लोगों का चालान भी काटा जाता है।
-रविशंकर निम,अपर पुलिस अधीक्षक, यातायात

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