जिद… सच की- चालाक चीन की भारत में घुसपैठ के मायने

सवाल यह है कि पड़ोसी चीन भारतीय सीमा में हमेशा घुसपैठ की फिराक में क्यों रहता है? क्या घुसपैठ चीन की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है? क्या डोकलाम मामले की तरह भारत और चीन के बीच कोई नया विवाद उत्पन्न हो सकता है? क्या चीन ऐसी कोशिशों से भारत पर दक्षिण चीन सागर में हस्तक्षेप नहीं करने का दबाव बनाना चाहता है?

Sanjay sharma

चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। चीन के सैनिकों ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश की सीमा में घुसपैठ की। इसके पहले अगस्त में चीन के सैनिक उत्तराखंड की सीमा में घुस गए थे और टेंट लगा लिया था। अहम सवाल यह है कि पड़ोसी चीन भारतीय सीमा में हमेशा घुसपैठ की फिराक में क्यों रहता है? क्या घुसपैठ चीन की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है? क्या डोकलाम मामले की तरह भारत और चीन के बीच कोई नया विवाद उत्पन्न हो सकता है? क्या चीन ऐसी कोशिशों से भारत पर दक्षिण चीन सागर में हस्तक्षेप नहीं करने का दबाव बनाना चाहता है? क्या भारत-रूस के नए सैन्य करार से चीन परेशान है और दबंगई दिखाने की कोशिश कर रहा है? क्या इस तरह की घुसपैठ दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर नहीं डालेगी?
भारत-चीन के बीच संबंध कभी दोस्ताना नहीं रहे हैं। चीन की नजरें अरुणाचल प्रदेश पर हैं। वह इस पर अपना दावा करता है। चीन, भारत के कई हजार किमी क्षेत्र पर कब्जा किए बैठा है। वह पाकिस्तान के साथ मिलकर पाक अधिकृत कश्मीर में आर्थिक गलियारा बना रहा है। इस पर अरबों रुपये खर्च कर चुका है। लिहाजा आतंकवाद के मुद्दे पर चीन कभी खुलकर नहीं बोलता है। कई मौकों पर उसने पाकिस्तान का वैश्विक मंच पर साथ दिया है। इसके अलावा वह दक्षिण चीन सागर पर भी अपना अधिकार जताता है। इसे लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव है। भारत आर्थिक गलियारे पर अपना विरोध जता चुका है। दक्षिण चीन सागर पर भी उसने अपना रुख साफ कर दिया है और इस पर चीन का दावा मानने से अप्रत्यक्ष रूप से इंकार कर दिया है। चीन को लगता है कि यदि भारत ने आर्थिक गलियारे के मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठा दिया तो उसके अरबों रुपये डूब जाएंगे। चीन इससे भी चिंतित है कि अमेरिका और भारत की दोस्ती दक्षिण चीन सागर में उसकी विस्तारवादी नीति पर रोड़ा का काम करेगी। वह रूस-भारत के बीच हुए ताजा सैन्य करार से भी परेशान है। यही वजह है कि चीन भारत को घरेलू समस्याओं में उलझाए रखना चाहता है। इसके लिए वह घुसपैठ की रणनीति पर चल रहा है। वह समझता है कि इससे भारत दबाव में रहेगा और विरोध नहीं करेगा। हालांकि इस तरह के घुसपैठ से विवाद की संभावना नहीं है। बावजूद इसके चीन को समझना चाहिए कि यह 1962 का भारत नहीं है। चीन जानता है कि अगर भारत से मधुर संबंध नहीं रहे तो उसके हाथ से बड़ा बाजार निकल जाएगा। बावजूद इसके चीन से सतर्क रहने की जरूरत है। भारत को इतिहास नहीं भूलना चाहिए। छोटी-छोटी घुसपैठ कई बार बड़े युद्ध का कारण बन जाती है।

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