जीपीएस भी नहीं लगा सका डीजल चोरी पर लगाम, नगर निगम के अफसर हुए हलकान

जीपीएस लगाने के बाद भी डीजल की खपत में कोई खास कमी नहीं आई और डीजल चोरी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। डीजल चोरी की शिकायत पर 6 जुलाई को आरआर विभाग में छापा मारा गया था। इस दौरान 19 गाडिय़ों में लगा जीपीएस खराब मिला था।

  • लाखों खर्च करने के बाद भी नतीजा निकला सिफर अब नई रणनीति पर विचार
  • डीजल मापने की मशीन लगाने पर हो रहा मंथन कंपनियों से मांगे प्रस्ताव

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। नगर निगम में लम्बे समय से चल रही डीजल चोरी पर लाखों खर्च कर लगाए गए जीपीएस भी लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अपनी योजना को पानी में जाते देख नगर निगम के अधिकारियों के पसीने छूट गए हैं। अब वे डीजल चोरी रोकने के लिए नयी रणनीति पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही नगर निगम प्रशासन जीपीएस को ना कर देगा। फिलहाल नये उपायों पर मंथन
चल रहा है।
नगर निगम के आरआर विभाग की बात करें तो यहां की कूड़ा गाडिय़ों से डीजल चोरी रोकने के लिए गाडिय़ों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगाया गया लेकिन यह डीजल चोरी रोकने में विफल रहा। डीजल की खपत में कोई कमी नहीं आई। बताया जा रहा है कि अब गाडिय़ों में डीजल नापने वाली मशीन लगवाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कई कम्पनियों से प्रस्ताव मांगा गया है। अपर नगर आयुक्त अमित कुमार के मुताबिक जीपीएस लगाने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों से रोज गाडिय़ों का रूट मैप मांगा जा रहा था। इसमें दिक्कत आ रही थी। इतना ही नहीं जीपीएस लगाने के बाद भी डीजल की खपत में कोई खास कमी नहीं आई और डीजल चोरी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। डीजल चोरी की शिकायत पर 6 जुलाई को आरआर विभाग में छापा मारा गया था। इस दौरान 19 गाडिय़ों में लगा जीपीएस खराब मिला था। इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधि से नियमित रूप से दस ऐसी गाडिय़ों का ब्यौरा देने को कहा गया जिनमें रोज पचास लीटर से ज्यादा डीजल की खपत हो रही थी। पांच दिन ब्यौरा देने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस बीच डीजल की खपत पहले की तरह होती रही। ऐसे में पूरे खेल पर लगाम कसने के लिए गाडिय़ों में ऐसी मशीनें लगवाने का फैसला लिया गया है, जिससे डीजल को नापा जा सके।

जनरेटर भी पी रहे डीजल, होगी जांच

जनरेटर चलाने के नाम पर भी डीजल चोरी होती है। विद्युत सप्लाई बाधित न होने के बावजूद कागजों पर जनरेटर चल रहे हैं। आलम यह है कि निगम के जोनल कार्यालय, भूमिगत वाहन पार्किंग, स्कूल और एसटीपी आदि जगहों पर लगे विभागीय जनरेटर रोजाना सैकड़ों लीटर डीजल पी रहे हैं। बीते दिनों जनरेटर के लिए तेल मंजूरी की फाइल अपर नगर आयुक्त अनिल मिश्रा के पास पहुंची तो डीजल की खपत देख उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने बिना जांच के किसी भी जनरेटर को तेल नहीं देने का निर्देश दिया है। यही नहीं पिछले पांच माह से लेकर अभी तक की बिजली कटौती और उसके सापेक्ष डीजल खपत की जांच होगी। नगर निगम में सभी आरआर विभाग, जोनल कार्यालय, मुख्यालय, एसटीपी, स्कूल समेत तमाम जगहों पर जनरेटर लगे हैं। इनके संचालन के लिए विभाग द्वारा तेल को मंजूरी दी जाती है।

ऐसे जीपीएस को किया फेल

कूड़ा वाहनों में जीपीएस को फेल करने में कार्यदायी संस्थाओं के ड्राइवरों का हाथ है। सूत्रों का कहना है कि गाडिय़ों में लगे जीपीएस को जानबूझकर तोड़ दिया जाता है, जिसकी तमाम बार जांच हो चुकी है। गाडिय़ों में जीपीएस लगने के बावजूद डीजल पर किए जा रहे खर्च में कमी नहीं आ रही है।

वेतन से होगी रिकवरी

जांच में निगम कर्मियों द्वारा यदि डीजल चोरी की पुष्टि होगी तो जिम्मेदारों के वेतन से रिकवरी की जाएगी। इसके लिए संबंधित बिजली उपकेंद्र की रिपोर्ट लगाई जाएगी ताकि पता चल सके कि बिजली आपूर्ति कितने से कितने बजे तक बाधित रही।

 

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