जिद… सच की- भ्रष्टाचार, सरकारी तंत्र और आम आदमी

सवाल यह है कि भ्रष्टïाचार के खिलाफ कड़े कानूनों के बावजूद रिश्वत देने और लेने पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? पारदर्शिता के तमाम दावे हवाई क्यों साबित हो रहे हैं? क्या सरकारी विभागों में बिना रिश्वत कोई काम नहीं हो रहा है? भ्रष्टïाचार के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या ऊपर से नीचे तक रिश्वत के पैसों की बंदरबांट की जा रही है? क्या राज्यों में गठित भ्रष्टïाचार निरोधक हेल्प लाइन शो पीस भर हैं?

SAnjay Shamra

देश को भ्रष्टïाचार मुक्त करने के प्रयास जमीन पर उतरते नहीं दिख रहे हैं। इंडिया करप्शन सर्वे के मुताबिक इस वर्ष 56 फीसदी लोगों ने काम कराने के एवज में विभिन्न सरकारी विभागों में रिश्वत दी। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष घूस देने वालों की संख्या में 11 फीसदी का इजाफा हुआ है। गत वर्ष 45 फीसदी लोगों ने रिश्वत दी थी। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया और लोकल सर्कल्स की ओर से आयोजित इस सर्वे में देश के 215 शहरों के पचास हजार लोगों ने भाग लिया है। अहम सवाल यह है कि भ्रष्टïाचार के खिलाफ कड़े कानूनों के बावजूद रिश्वत देने और लेने पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? पारदर्शिता के तमाम दावे हवाई क्यों साबित हो रहे हैं? क्या सरकारी विभागों में बिना रिश्वत कोई काम नहीं हो रहा है? भ्रष्टïाचार के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या ऊपर से नीचे तक रिश्वत के पैसों की बंदरबांट की जा रही है? क्या राज्यों में गठित भ्रष्टïाचार निरोधक हेल्प लाइन शो पीस भर हैं? क्या सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति इसका कारण है? जनता रिश्वत क्यों दे रही है?
देश में भ्रष्टïाचार चरम पर है। सरकार के दावों के बावजूद स्थितियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है। इसमें दो राय नहीं है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टïाचार का घुन लग चुका है। अधिकांश विभागों में बिना रिश्वत काम नहीं होता है। रिश्वत नहीं मिलने पर आम आदमी को विभागों के चक्कर लगवाए जाते हैं। भ्रष्टïाचार का पूरा नेटवर्क है। इसमें अधिकारी-कर्मचारी और बिचौलिए सभी शामिल हैं। अधिकांश विभागों में बिचौलिए पैसा लेकर काम कराते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम, संपत्ति के पंजीकरण, बिजली, परिवहन, टैक्स और पुलिस विभाग में सबसे अधिक रिश्वत चलती है। उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत खराब है। यहां के 59 फीसदी लोगों ने साल में कम से कम एक बार रिश्वत देने की बात स्वीकार की है। हैरानी की बात यह है कि लोग खुद घूस दे रहे हैं। समाज में रिश्वतखोरी को खराब नहीं माना जाता है। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि भ्रष्टïाचार के खिलाफ राज्य सरकारों की कमजोर इच्छा शक्ति रिश्वतखोरी की बड़ी वजह है। जिन राज्यों में भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए भी गए है, वे निष्प्रभावी हैं। घूस देने और लेने को अपराध घोषित किए जाने के बावजूद रिश्वतखोरी बढ़ी है। सरकार को इस पर मंथन की जरूरत है। यदि सरकार भ्रष्टïाचार को समाप्त करना चाहती हैं तो उसे सरकारी विभागों से लालफीताशाही को खत्म करना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि लोगों के काम जल्दी और आसानी से हो सकें। वहीं सरकार को समाज में रिश्वतखोरी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना होगा।

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