देवी प्रतिमा स्थापित करने से रोकने पर दलित परिवारों ने दी धर्म परिवर्तन की धमकी, विपक्ष ने सरकार को घेरा

  • पुलिस प्रशासन में मची खलबली, मेरठ के इंचौली गांव के दलित गुस्से में
  • कहा, उन्हें अपना धर्म मानने की भी आजादी नहीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन तथा धर्म वापसी का मामला जोरों पर है। नवरात्रि में मेरठ में मां काली की मूर्ति स्थापित करने से दलितों को दबंगों ने रोका तो 50 दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी। इससे पुलिस प्रशासन में हडक़ंप मच गया है। दूसरी ओर इस मामले पर सपा समेत विपक्ष ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
इंचौली गांव के दलितों का आरोप है कि गांव के कुछ दबंगों ने मंदिर में उन्हें मां काली की प्रतिमा स्थापित नहीं करने दी। घटना से इलाके के दलित गुस्से में हैं। इनका कहना है कि उन्हें अपना धर्म मानने की भी आजादी नहीं है। दबंगों के रवैये का विरोध कर रहे राजकुमार ने कहा कि क्या हम हिन्दू नहीं हैं, हमें मंदिर में मां काली की प्रतिमा लगाने नहीं दी जा रही है। हम कहां जाएं, इससे अच्छा है कि हम अपना धर्म ही बदल लें। मंदिर में मां काली की प्रतिमा स्थापित करने का विरोध करने वाले लोग मंदिर परिसर में कार और ट्रैक्टर पार्क करते हैं। विजय कुमार ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान उन लोगों ने शिव मंदिर में भंडारे का आयोजन किया था और इसी दौरान वहां पर काली मां की प्रतिमा लगाने पर सहमति बनी थी लेकिन जब वे प्रतिमा लगाने के लिए गये कुछ लोगों ने मंदिर कमेटी का सदस्य बताकर काली की प्रतिमा लगाने का विरोध किया।

होगी जांच
मां काली की मूर्ति स्थापना करने के मामले में एडीएम रामचंद्र ने बताया कि विरोध करने वालों का कहना है कि वह लोग एक मंदिर में मां काली की मूर्ति स्थापित करना चाहते थे। इसके विपरीत कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। इस मामले की जांच होगी। उनके धर्म परिवर्तन की मांग के बारे में अभी पता नहीं है। यह मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा

दलित परिवारों को मूर्ति स्थापित करने से दबंगों द्वारा रोका जाना प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। यह सरकार और पुलिस का काम है कि यदि कोई किसी के अधिकारों का हनन कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो।
-उदयवीर सिंह, एमएलसी, सपा

जहां भी भाजपा की सरकारें हैं, वहां दलितों और पिछड़ों को टारगेट किया जा रहा है। प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
-अशोक सिंह, प्रवक्ता, कांग्रेस

हत्या के दो मामलों में रामपाल दोषी करार

  • विवादित संत के सतलोक आश्रम में भडक़ी हिंसा में 7 लोगों की हुई थी मौत
  • सेंट्रल जेल में सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, 16 और 17 को सजा का ऐलान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
हिसार। सतलोक आश्रम प्रकरण में विवादित संत रामपाल को हत्या के दोनों मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया है। सेंट्रल जेल में कोर्ट बनाया गया और अतिरिक्तजिला और सत्र न्यायाधीश डी. आर. चालिया ने मामले की सुनवाई करने के बाद फैसला दिया। 2014 में रामपाल के आश्रम में भडक़ी हिंसा में 7 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 5 महिलाएं और एक बच्चा शामिल था। जेल के अंदर वीडियो कॉन्फें्रसिंग के जरिए रामपाल की पेशी हुई। पूरे हिसार में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। जिले में धारा-144 लगा दी गई थी। दोनों मामलों में सजा का ऐलान 16 और 17 अक्टूबर को किया जाएगा।
18 नवंबर 2014 को सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को बरवाला स्थित उसके आश्रम से बाहर निकालने के लिए पुलिस ने अभियान चलाया था। रामपाल के बाहर निकालने तक काफी हिंसा हुई थी। हिंसा के दो मामलों में रामपाल समेत कई लोगों पर केस दर्ज किया गया था। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अजय पराशर के तबादले के बाद मुकदमे की सुनवाई अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश डी. आर. चालिया की अदालत में हुई।

दो आईएएस अफसरों ने खुद संभाली सफाई की कमान

  • कमिश्नर अनिल सागर और डीएम राजशेखर के प्रयासों से बदलने लगी बस्ती जिले की सूरत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इंसान का हौसला बुलंद हो तो वह पहाड़ों को काटकर रास्ता बना सकता है। इसी तरह के जज्बे के साथ प्रदेश के छोटे से जिले बस्ती को संवारने और सजाने के काम में वहां के डीएम राजशेखर और कमिश्नर अनिल सागर जुट गये हैं। डीएम और कमिश्नर मिलकर जनता के बीच जाकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनता को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं ये दोनों अधिकारी शहर के गली मोहल्लों में जाकर झाड़ू लगाकर लोगों को सफाई के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहे हैं। इन दोनों अधिकारियों के काम की ब्यूरोक्रेसी में काफी तारीफ हो रही है। बस्ती के कमिश्नर अनिल सागर और डीएम राजशेखर अपनी फिटनेस और बेहतर कार्यशैली के कारण अक्सर लोगों के बीच चर्चा में रहते हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ को संजाने-संवारने में अनिल सागर और राजशेखर की अहम भूमिका रही है क्योंकि दोनों ही लखनऊ के डीएम रह चुके हैं। राजशेखर के बेहतर कामों का ही परिणाम था कि स्कूल में पढऩे वाले छोटे-छोटे बच्चों को भी उस समय अपने जिले के डीएम का नाम याद था।

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