जिद… सच की- रेल हादसों से कब सबक सीखेगी सरकार?

अहम सवाल यह है कि बार-बार रेल हादसों का शिकार क्यों हो रही है? क्या रेल यात्रियों और माल ढुलाई के बढ़ते बोझ से रेल की पटरियां चरमराने लगी हैं? क्या ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकता है? रेलवे को हाईटेक सुरक्षा और सतर्कता तकनीकी से लैस क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या रेलवे में व्याप्त भ्रष्टïाचार और लापरवाही ऐसे हादसों की मुख्य वजहें हैं? रेलवे में सुधार की तमाम सिफारिशों को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया है?

Sanjay Sharma

रायबरेली में फरक्का से दिल्ली जाने वाली ट्रेन पटरी से उतर गई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं। रेलवे और यूपी सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। इन सबके बीच अहम सवाल यह है कि बार-बार रेल हादसों का शिकार क्यों हो रही है? क्या रेल यात्रियों और माल ढुलाई के बढ़ते बोझ से रेल की पटरियां चरमराने लगी हैं? क्या ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकता है? रेलवे को हाईटेक सुरक्षा और सतर्कता तकनीकी से लैस क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या रेलवे में व्याप्त भ्रष्टïाचार और लापरवाही ऐसे हादसों की मुख्य वजहें हैं? रेलवे में सुधार की तमाम सिफारिशों को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया गया है? क्या यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की नहीं है? क्या मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर रेलवे अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ सकती है?
भारतीय रेल दुनिया के बड़े रेल नेटवर्क में एक है। यहां प्रतिदिन करीब दो करोड़ लोग रेल से सफर करते हैं और मालगाडिय़ों के जरिए प्रतिदिन 80 लाख टन सामान की ढुलाई की जाती है। रेलवे देश की जीडीपी में अहम भूमिका निभाती है। बावजूद रेलवे में अव्यवस्था का आलम है। जहां विदेशों में कभी-कभी रेल हादसे होते हैं, भारत में अक्सर ट्रेन पटरी से उतर जाती है। अब तक हुए रेल हादसों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। बावजूद सरकार सबक सीखने को तैयार नहीं है। आज भी रेलवे पुराने ढर्रे पर चल रही है। उसके पास पुराने सिग्नल सिस्टम हैं। हादसों से सतर्क करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। रेल पटरियों के टूटने या उखड़ जाने की कोई पूर्व सूचना ट्रेन के ड्राइवर को नहीं मिल पाती है। लापरवाही का आलम यह है कि कई बार ट्रेनों को गलत ट्रैक पर रवाना कर दिया जाता है। न्यू फरक्का एक्सप्रेस के डीरेल होने के पीछे यही कारण सामने आ रहा है। ट्रैक की नियमित चेकिंग में भी कोताही बरती जा रही है। फिश प्लेट के सरक जाने की स्थिति में उसे तत्काल ठीक नहीं करने से भी रेल हादसों का शिकार हो जाती है। माल ढुलाई के कारण पटरियां कमजोर हो रही हैं लेकिन उनको चिंहित कर बदलने की कार्रवाई धीमी गति से चल रही है। कई रेलवे ट्रैक ऐसे हैं जिन पर लकड़ी के पुराने स्लिपर डाले गए हैं। रेलवे को सुधारने की तमाम सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यदि सरकार इन हादसों को कम करना चाहती है तो उसे रेलवे को हाईटेक करना होगा। खतरे के संकेत देने वाले यंत्रों से लैस करना होगा। वहीं पटरियों की जांच में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

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