शहर में रोजाना बिक जाती है दो करोड़ की शराब पर पुलिस को नहीं मिलते शराबी

  • शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई में बरती जा रही लापरवाही
  • सप्ताह में एक बार भी नहीं चलाया जाता है अभियान
  • यातायात पुलिस के पास नहीं है राजधानी भर के आंकड़ें
  • शराब पीकर गाड़ी चलाने से हो रही दुर्घटनाओं पर भी गंभीर नहीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ में हर वर्ग और हर जनपद के लोग निवास करते हैं। यहां रोजाना दो करोड़ की शराब बिक जाती है लेकिन पुलिस वालों को शराब पीकर वाहन चलाने वाले खोजे नहीं मिलते। विभाग के आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं। तो क्या नवाबों के शहर में शराब पीकर वाहन नहीं चलाए जाते हैं या फिर कोई और बात है। ऐसे में सवाल उठता हैंं कि कहीं सूर्य अस्त होने के बाद पुलिस भी मस्त तो नहीं हो जाती है।
आए दिन हो रही सडक़ दुर्घटना में लोगों की जान जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सडक़ दुर्घटनाओं का एक कारण शराब पीकर वाहन चलाना भी है। कई सडक़ हादसे रात में होते है। इसके बाद भी पुलिस की कार्रवाई हैरान करने वाली है। पूरे वर्ष पुलिस हेलमेट, डीएल सहित कई कमियों पर प्रतिदिन चालान काटती है लेकिन शराब के मामले में पुलिस सप्ताह में भी एक बार अभियान चलाना उचित नहीं समझती है। ऐसा क्यों हो रहा है यह पुलिस विभाग ही जानता है। सवाल उठता है कि क्या पुलिस कार्रवाई नहीं करती है या फिर कोई और बात है। सूत्रों की मानें तो सूर्य अस्त होने के बाद तमाम पुलिसकर्मी खुद भी मस्त हो जाते हैं। ऐेस में उनको कैसे पता चलेगा कि चालक शराब के नशे में है या नहीं। वहीं दूसरी तरफ देखें तो आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नवाबों के शहर में प्रतिदिन दो करोड़ रुपये के ऊपर से शराब बिकती है। नवाबों के शहर में हर गली और मोहल्ले में मॉडल शॉप, अंगे्रजी शराब और देशी शराब के ठेके बने हुए हैं। जहां लोग वाहनों से पहुंचकर न केवल शराब की खरीदारी करते हैं बल्कि वहीं पर पीते भी हैं। ये वाहन चालक शराब पीने के बाद अपने वाहनों से जाते देखे जा सकते हैं। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ पुलिस कितनी सजग है इसका एक नमूना देखा जा सकता है। एक वर्ष में महज 64 लोगों का चालान किया गया वहीं 20,000 रुपये जुर्माना वसूला गया। साफ है, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के प्रति राजधानी पुलिस बेहद लापरवाहीपूर्ण रवैया अपना रही है।

क्या कहते हंै

अधिकारीइस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक यातायात रविशंकर निम का कहना है कि इसकी विस्तृत जानकारी थानों से मिलेगी। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया जाता है।

क्या है बे्रथ एनेलाइजर

बे्रथ एनेलाइजर एक ऐसी मशीन होती है जिससे पुलिस यह पता लगाती है कि चालक शराब के नशे में है या नहीं। यदि वह नशे में है तो कितना प्रतिशत है। मशीन की रीडिंग के बाद ही चालक का चालान किया जाता है। मशीन के नहीं होने पर चालक बहस करने लगते हैं जिसके कारण पुलिस बिना मशीन के चालान करने में भी असमर्थ हो जाती है।

आधे ब्रेथ एनेलाइजर खराब

पुलिस सूत्रों की मानें तो यातायात पुलिस में आधा दर्जन से ऊपर बे्रथ एनेलाइजर है, जिसमें आधे खराब पड़े हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ प्रतिदिन चालान नहीं काट पाती है।

 

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