जिद… सच की- हर बार यूपी-बिहार के लोगों पर हमले क्यों?

सवाल यह है कि गुजरात और महाराष्टï्र की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले यूपी और बिहार के लोगों को ही हर बार क्यों निशाना बनाया जाता है? क्या गुजरात में हुए हमलों के पीछे कोई गहरी साजिश है या चुनावों को देखते हुए सियासी चालें चली जा रही हैं? क्या क्षेत्रीयता की भावना ने गुजरातियों को अपनी जकड़ में ले लिया है? यूपी और बिहार के लोग गुजरात और महाराष्टï्र जैसे राज्यों में जाने को मजबूर क्यों हैं?

Sanjay Sharma

महाराष्टï्र के बाद अब गुजरात में यूपी और बिहार के निवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन पर हमले हो रहे हैं। गुजरात छोडक़र भाग जाने की धमकी दी जा रही है। हमलों से डरे दोनों राज्यों के लोग गुजरात से पलायन कर रहे हैं। सवाल यह है कि गुजरात और महाराष्टï्र की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले यूपी और बिहार के लोगों को ही हर बार क्यों निशाना बनाया जाता है? क्या गुजरात में हुए हमलों के पीछे कोई गहरी साजिश है या चुनावों को देखते हुए सियासी चालें चली जा रही हैं? क्या क्षेत्रीयता की भावना ने गुजरातियों को अपनी जकड़ में ले लिया है? यूपी और बिहार के लोग गुजरात और महाराष्टï्र जैसे राज्यों में जाने को मजबूर क्यों हैं? राज्य सरकार हमलों को रोक क्यों नहीं पा रही है? ऐसे गंभीर मामले में भी राजनीतिक दल अपनी सियासी रोटियां सेंकने से बाज क्यों नहीं आते हैं?
मामला तब गरमाया जब गुजरात के साबरकांठा जिले में नाबालिग लडक़ी से रेप के मामले में बिहार का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर यूपी और बिहार के लोगों के खिलाफ घृणित संदेश फैलाए गए। क्षत्रिय ठाकोर सेना ने गुजरात में अन्य राज्यों के लोगों को नौकरी नहीं देने की बात कही। इसके बाद स्थितियां बिगड़ गई। हमलों के पीछे कई कारण हैं। यूपी और बिहार के लोग रोजगार की तलाश में गुजरात पहुंचते हैं। वे यहां की फैक्ट्रियों में मजदूरी करते हैं या कोई छोटा-मोटा काम कर जीविका चलाते हैं। गुजरात के चैंबर ऑफ कॉमर्स ने स्वीकार किया है कि यूपी व बिहार के लोगों के पलायन से फैक्ट्रियों के कामकाज ठप हो गया है। विडंबना यह कि तमाम संसाधनों के बावजूद बिहार व यूपी में रोजगार का पर्याप्त सजृन नहीं हो पाया है लिहाजा यहां के युवा दूसरे प्रांतों में जाने को मजबूर हैं। इससे स्थानीय नागरिक नाराज है। उन्हें लगता है कि ये लोग उनकी रोजी-रोटी छीन रहे हैं। इसी आक्रोश को ठाकोर सेना जैसे स्थानीय संगठन हवा दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन हमलों के पीछे सियासी चाल है। पीएम मोदी के गृहराज्य में यूपी व बिहार के लोगों पर हमला कराकर भाजपा को लोकसभा चुनाव में नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यूपी और बिहार में भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में विपक्षियों को धराशायी कर दिया था। जिस तरह सियासत रोज नीचे गिर रही है, उसको देखते हुए इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। बावजूद इसके सियासी दलों को ऐसे गंभीर मुद्दे पर सियासत नहीं करनी चाहिए क्योंकि दांव उल्टा भी पड़ सकता है। क्षेत्रीयता की बढ़ती भावना अखंड भारत और लोकतंत्र दोनों को नुकसान पहुंचाएगी।

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