जिद… सच की- मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर करार के निहितार्थ

सवाल यह है कि भारत को रूस के इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सिस्टम भारतीय सेना को सुरक्षा कवच प्रदान करने में सफल होगा? क्या इसका असर पड़ोसी चीन और पाकिस्तान की सैन्य रणनीति पर पड़ेगा? क्या इस डील का भारत और अमेरिका के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा? रूस के साथ हुए ताजा करार से क्या एशिया में हथियारों की होड़ बढ़ जाएगी?

Sanjay Sharma

अमेरिकी प्रतिबंध की धमकी को दरकिनार कर भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर करार कर लिया है। भारत दौरे पर आए रूस के राष्टï्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी ने इस करार पर हस्ताक्षर किए। भारत इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांच रेजिमेंट्स खरीद रहा है। इस पर 5 अरब डॉलर खर्च होंगे। अहम सवाल यह है कि भारत को रूस के इस अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह सिस्टम भारतीय सेना को सुरक्षा कवच प्रदान करने में सफल होगा? क्या इसका असर पड़ोसी चीन और पाकिस्तान की सैन्य रणनीति पर पड़ेगा? क्या इस डील का भारत और अमेरिका के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा? रूस के साथ हुए ताजा करार से क्या एशिया में हथियारों की होड़ बढ़ जाएगी? क्या आने वाले दिनों में यह सिस्टम युद्ध की संभावना को कम कर सकेगा?
भारत विस्तारवादी चीन और आतंकवादियों के पनाहगाह पाकिस्तान से घिरा है। चीन भारतीय सीमाओं में घुसपैठ करता है तो पाकिस्तान परमाणु युद्ध की धमकी देता है। इसके अलावा पाकिस्तान भारत को अस्थिर करने के लिए आतंकवादियों को सीमा पार से भेजता रहता है। ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा को चाक-चौबंद करना बेहद जरूरी है। ताजा स्थिति यह है कि भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की कमी है। चीन और पाकिस्तान के बीच जिस तरह गलबहियां हो रही हैं, उसको देखते हुए भारत को कभी भी दो मोर्चो पर एक साथ युद्ध करना पड़ सकता है। पाकिस्तान के पास एफ-16 अलावा चीन से मिले जे-17 जैसे अत्याधुनिक फाइटर प्लेन हैं। वहीं पड़ोसी चीन के पास भी घातक और अत्याधुनिक पीढ़ी के लड़ाकू विमान है। इससे निपटने के लिए रूस का एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम सक्षम है। इसके जरिए लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और ड्रोन्स को पलक झपकते मार गिराया जा सकता है। सिर्फ तीन एस-400 सिस्टम से पाकिस्तान के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सकती है। सीमा पर तैनाती के बाद यह पड़ोसी देशों से यु्द्ध की आशंका को काफी कम कर देगा। वहीं अमेरिका की चिंता यह है कि एस-400 का इस्तेमाल यूएस फाइटर जेट्स की गुप्त क्षमताओं को टेस्ट करने के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि वह प्रतिबंध की चेतावनी दे रहा है। बावजूद इसके अमेरिका शायद ही भारत पर प्रतिबंध लगाए क्योंकि चीन के खिलाफ उसे भारत की जरूरत है। दोनों देशों के मधुर संबंधों को अमेरिकी राष्टï्रपति ट्रंप भी खराब नहीं करना चाहेंगे। हां, इस सिस्टम से एशिया में हथियारों की दौड़ बढ़ सकती है। कुल मिलाकर यह डील भारतीय सेना को और मजबूत करेगी।

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